राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में कई क्षेत्रों में प्रगति की गुंजाइश है। नेताओं को इस संभावना पर काम करना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हिमाचल से बाद में बना उत्तराखंड कई मामलों में आगे निकल गया है, इसलिए प्रदेश में बेहतर कार्यसंस्कृति विकसित करना जरूरी है।
स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में टीबी के मरीजों की संख्या बढ़ना चिंता का विषय है। पिछले वर्ष उम्मीद थी कि हिमाचल टीबी मुक्त राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा, लेकिन अन्य राज्यों तुलना में यहां मरीजों की संख्या बढ़ी है। उन्होंने कहा कि टीबी मुक्त और नशा मुक्त हिमाचल बनाने के लिए अभियान चलाया गया, जिसमें मीडिया ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
राज्यपाल ने कहा कि केवल राजनीति ही नहीं होनी चाहिए, बल्कि कार्यसंस्कृति का भी विकास होना जरूरी है। उन्होंने बताया कि उनके कार्यकाल के दौरान राजभवन और सरकार के बीच किसी प्रकार का टकराव नहीं रहा और सहयोगात्मक वातावरण में काम हुआ।
उन्होंने कहा कि हिमाचल की खूबसूरती और यहां के लोगों का स्नेह ऐसा है कि कोई भी यहां बार-बार आना चाहता है। राज्यपाल ने विश्वास जताया कि भविष्य में भी वह किसी न किसी अवसर पर हिमाचल जरूर आएंगे, भले ही राज्यपाल के रूप में नहीं बल्कि किसी सम्मेलन या कार्यक्रम के तहत आएंगे। उन्होंने सरकार, मीडिया और प्रदेश की जनता का सहयोग मिलने पर आभार भी व्यक्त किया।