वर्ष 2020 में इन बसों ने जवाब देना शुरू कर दिया। करोड़ों रुपये की इन बसों की रिपेयर नहीं हो पा रही है। निगम के पास इन बसों को ठीक करने के लिए कलपुर्जे नहीं हैं। चीन की कंपनी की इन बसों को ठीक करने के लिए निगम के पास पर्याप्त स्टाफ नहीं है। हालत यह है कि कई बसों की बैटरी खराब है तो कई में तकनीकी खराबी आई है। वर्कशॉप में खड़ी बसों के कलपुर्जे निकालकर दूसरी बसों में डाले जा रहे हैं। परिवहन निगम ने जब इन्हें खरीदा था, उस समय अधिकारियों ने करार के दौरान मरम्मत का वार्षिक क्लॉज नहीं डाला। अब करोड़ों की यह बसें जगह-जगह सड़क पर खड़ी हैं।
जिस समय इन बसों को खरीदा गया, उस वक्त एक बस की कीमत एक करोड़ रुपये से ज्यादा थी। निगम के बेड़े में इस समय 110 ई- बसें हैं। इन्हें शिमला, धर्मशाला और कुल्लू मनाली में चलाया जा रहा है। शिमला में 22 बसें खराब हैं जबकि धर्मशाला, कुल्लू और मनाली में बसें चल रही हैं।
पहले जो ई- बसें खरीदी गई थीं, उनमें एएमसी का क्लॉज नहीं डाला गया था। परिवहन निगम में अब जो बसें आ रही हैं, उन्हें बसों की रिपेयर से लेकर बैटरी बदलने तक का क्लॉज डाला गया है। - मुकेश अग्निहोत्री, उप मुख्यमंत्री