शिमला में उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरना देते सीटू कार्यकर्ता।
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सीटू के अखिल भारतीय आह्वान पर बुधवार को प्रदेश के विभिन्न जिलों में मजदूरों ने रैली, धरने और प्रदर्शन किए। सीटू के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने बताया कि आंदोलन को तेज करते हुए 7 और 8 जनवरी 2021 को ब्लॉक और जिला मुख्यालयों पर जेल भरो, चक्का जाम और गिरफ्तारियां होंगी। आंदोलन के अगले चरण में 24 से 31 जनवरी तक प्रदेश के विभिन्न जिलों में जत्थे चलाकर केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों का पर्दाफाश किया जाएगा।
इस दौरान शिमला, कुल्लू और हमीरपुर से विभिन्न जिलों के लिए तीन जत्थे चलाए जाएंगे। सीटू के महासचिव प्रेम गौतम ने कहा कि श्रम कानूनों को खत्म कर बनाई गईं मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताओं के खिलाफ, न्यूनतम वेतन 21 हजार रुपये घोषित करने, आंगनबाड़ी, मिड डे मील और आशा वर्कर्स को सरकारी कर्मचारी घोषित करने और हरियाणा की तर्ज पर वेतन देने, फिक्स टर्म, ठेका, पार्ट टाइम, टेंपरेरी और कॉन्ट्रेक्ट रोजगार पर अंकुश लगाने, आठ के बजाए बारह घंटे ड्यूटी करने के खिलाफ, कोरोना काल में हुई मजदूरों की छंटनी, बेरोजगारी, हर आयकर मुक्त परिवार को 7500 रुपये की आर्थिक मदद, हर व्यक्ति को दस किलो राशन की सुविधा, मजदूरों के वेतन में कटौती, ईपीएफ और ईएसआई की राशि में कटौती, किसान विरोधी तीन कानूनों और बिजली विधेयक 2020 के खिलाफ हिमाचल प्रदेश के मजदूर सड़कों पर उतरे।