विक्रमादित्य ने पोस्ट में लिखा कि एक सच्चे आस्थावान और जनप्रतिनिधि के रूप में वह संकल्प लेते हैं कि धार्मिक स्थलों, देव नीति और प्राकृतिक संपदा के संरक्षण को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया जाएगा। सच्ची भक्ति तभी सार्थक होती है जब हमारे विचार और कार्य पर्यावरण के अनुकूल हों। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि सभी योजनाओं और परियोजनाओं में हिमाचल की सांस्कृतिक विरासत, पर्यावरण और मंदिरों की रक्षा को सर्वोपरि रखा जाए। उन्होंने कुल्लू में आयोजित जगती का समर्थन करते हुए देव समाज और नागरिकों से आह्वान किया कि वे मंदिरों, धार्मिक स्थलों और प्राकृतिक सौंदर्य की रक्षा में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि हिमाचल ग्रीन डेवलपमेंट फंड, क्लाइमेट स्मार्ट बिल्डिंग कोड और पारंपरिक ज्ञान को नीतिगत स्तर पर शामिल कर राज्य के सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण को सुनिश्चित किया जाएगा।