राज्य भर के हजारों शिक्षकों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की निगाहें इस बैठक पर टिकी हुई हैं। बैठक में यह तय किया जाएगा कि सीबीएसई स्कूलों में सेवारत शिक्षकों की तैनाती किस आधार पर की जाएगी। बीते दिनों हुई कैबिनेट बैठक में सेवारत शिक्षकों की तैनाती को लेकर सरकार के सामने नया प्रशासनिक पेच खड़ा हो गया है। मंत्रियों ने शिक्षा सचिव की ओर से दी गई प्रस्तुति का विरोध करते हुए विभिन्न सुझाव और आपत्तियां दर्ज करवाई हैं। इसके बाद सरकार ने अंतिम निर्णय फिलहाल टालते हुए कमेटी गठित कर दी है।
यह कमेटी तय करेगी कि सीबीएसई पाठ्यक्रम वाले सरकारी स्कूलों में किन शिक्षकों की नियुक्ति की जाए। प्रदेश के विभिन्न स्कूलों में सेवारत शिक्षकों में से 5623 को सीबीएसई स्कूलों में नियुक्त करने की योजना थी। इसके लिए शिक्षा बोर्ड धर्मशाला के माध्यम से शिक्षकों की परीक्षा ली गई थी। स्क्रीनिंग टेस्ट में कुल 9821 शिक्षक शामिल हुए थे। 6084 शिक्षक मेरिट में शामिल हुए थे। इनकी काउंसलिंग के लिए निदेशालय ने बीते माह शेड्यूल भी जारी कर दिया था। हालांकि बाद में पंचायतीराज चुनावों का हवाला देते हुए शेड्यूल को वापस ले लिया था।
सीबीएसई स्कूलों में सेवारत शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर सरकार की ओर से जारी नियमों के अनुसार मेरिट में प्राप्त स्थान के आधार पर शिक्षकों को उनकी पसंद के स्कूलों में नियुक्त करना था। ऐसे में पहले से उन स्कूलों में नियुक्त शिक्षकों के तबादले करने होंगे। प्रदेश में 5623 शिक्षकों को नई जगह तैनाती देने से इतने ही शिक्षकों को अन्य स्कूलों में भेजने को लेकर पेश आ रही दिक्कतों ने अब इस योजना को फंसा दिया है। सरकार ने प्रदेश के मुख्य क्षेत्रों के स्कूलों को सीबीएसई से संबद्ध किया है।