यह मामला शिमला जिले की चौपाल तहसील के नवनी गांव की रहने वाली शांति से जुड़ा है। वर्ष 1972 में शांति के पिता मीना राम को सरकार से नौतौड़ के तहत 3 बीघा 2 बिस्वा जमीन मंजूर हुई थी। उन्हें जमीन का कब्जा मिल गया और वे उस पर खेती भी करने लगे, लेकिन राजस्व अधिकारियों की लापरवाही के चलते जमीन का सरकारी पट्टा साइन नहीं हो सका। मीना राम के निधन के बाद उनकी पत्नी ने पट्टा जारी करने की अर्जी दी। पट्टा दोबारा तैयार हुआ पर अधिकारियों ने फिर दस्तखत नहीं किए।
2012 में मां के इंतकाल के बाद परिवार में अकेली वारिस शांति बची, जो उस जमीन पर लगातार खेती कर रही थी। वर्ष 2023 में शांति ने प्रशासन से गुहार लगाई कि जमीन का पट्टा उनके नाम किया जाए। एक जनवरी 2024 को एडीएम शिमला ने शांति का आवेदन यह कहकर रद्द कर दिया कि 1980 के एक सरकारी निर्देश के मुताबिक शादीशुदा बेटियों को नौतौड़ जमीन का पट्टा नहीं दिया जा सकता। इसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
वर्ष 1980 का पत्र केवल स्पष्टीकरण था : कोर्ट
पीठ ने स्पष्ट किया कि वर्ष 1980 का पत्र केवल एक प्रशासनिक स्पष्टीकरण था। हिमाचल प्रदेश नौतौड़ लैंड रूल्स, 1968 में ऐसा कोई नियम नहीं है जो विवाहित बेटी को कानूनी वारिस के रूप में भूमि का दावा करने से रोकता हो।