फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हिमाचल संयुक्त कर्मचारी महासंघ: चौहान बोले- तीन हफ्ते में कर्मचारियों के मसले नहीं सुलझाए तो आंदोलन

Mon, 01 Aug 2022 09:14 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

महासंघ सरकार से संशोधित वेतनमान के एरियर का भुगतान एकमुश्त भुगतान सहित तीन फीसदी महंगाई भत्ते (डीए) की किस्त जारी करने की मांग प्रमुखता से कर रहे हैं।  सरकार विभागों में लगे आउट सोर्स कर्मचारियों और कंप्यूटर शिक्षकों को स्थायी करने के मुद्दे को भी उठाया गया है।
विज्ञापन
संयुक्त कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हिमाचल संयुक्त कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने कहा कहा कि प्रदेश सरकार ने तीन हफ्ते में प्रदेश के कर्मचारियों के मसले नहीं सुलझाए गए तो राज्य सचिवालय के बाहर आंदोलन करेंगे।  महासंघ सरकार से संशोधित वेतनमान के एरियर का भुगतान एकमुश्त भुगतान सहित तीन फीसदी महंगाई भत्ते (डीए) की किस्त जारी करने की मांग प्रमुखता से कर रहे हैं।  सरकार विभागों में लगे आउट सोर्स कर्मचारियों और कंप्यूटर शिक्षकों को स्थायी करने के मुद्दे को भी उठाया गया है। महासंघ नेताओं ने सोमवार को कर्मचारियों की मांगों को लेकर मुख्य सचिव आरडी धीमान को सचिवालय में जाकर आठ सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। कर्मचारियों से जुड़े मसलों पर महासंघ नेताओं ने मुख्य सचिव से हस्तक्षेप कर सुलझाने की मांग की है। मुख्य सचिव ने इन मामलों को सुलझाने का आश्वास दिया है।

विज्ञापन


इसके बाद महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेद्र चौहान और मुख्य सलाहकार विनोद कुमार ने यहां प्रेस सम्मेलन में संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार को 45 दिन की मोहलत मांगें मानने को दी थी और आज एक माह का समय पूरा हो गया है। सरकार ने महासंघ की मांगों पर कोई गौर नहीं किया। अब महासंघ ने तीन हफ्ते का समय सरकार को मांगे मानने के लिए दिया है। इस बीच मांगें नहीं मी गई तो सचिवालय के बाहर आंदोलन किया जाएगा।  महासंघ नेताओं ने कहा कि कर्मचारियों को टाइम स्केल देने और कर्मचारियों की वेतन  विसंगतियां दूर करने की माग भी की गई है। एक जनवरी, 2016 से पहले सेवानिवृत्त पेंशनर की पेंशन विसंगति दूर करने का मामला भी उठाया गया है। इसके अलावा कर्मचारियों को दिए जाने वाले सभी भत्तों में भी संशोधन का मसला उठाया गया है।   

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें