इन्वेस्टर मीट की तैयारियों की समीक्षा को लेकर पहली बैठक में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि निवेश के साथ यह भी देखा जाएगा कि प्रदेश के पर्यावरण से कोई छेड़छाड़ न हो।
अभी तक विभागों की चिहिन्त व प्रस्तावित निवेश क्षमता में ऊर्जा क्षेत्र में 20,000 करोड़, निर्माण क्षेत्र में 15,000 करोड़, पर्यटन क्षेत्र में 10,000 करोड़, कृषि क्षेत्र में 5,000 करोड़, सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स व कौशल विकास क्षेत्र में 5,000 करोड़, आवास व रियल एस्टेट में 5,000 करोड़, स्वास्थ्य व आयुर्वेद
क्षेत्र में 5,000 करोड़ और अधोसंरचना लॉजिस्टिक व लोक निर्माण विभाग में 2,000 करोड़ की निवेश क्षमता शामिल है। उन्होंने कहा कि बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के साथ एकल खिड़की एजेंसी बनाकर हिमाचल प्रदेश निवेश संवर्द्धन नीति बनाई जाएगी।
वहीं, इन्वेस्टर मीट के लिए कॉमन वेबसाइट नए ढंग से तैयार की जाएगी ताकि निवेशकों को एक क्लिक पर क्षमता व निवेश की जानकारी मिल सके। मुख्यमंत्री ने इकाईयां स्थापित कराने के लिए उपायुक्तों को जिलों में विशिष्ट जलवायु, स्थान व क्षमता के साथ लैंड बैंक की पहचान करने को कहा।
बैठक में निर्णय लिया कि प्रदेश में पांच छोटे सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इनमें पर्यटन के लिए मिनी कॉन्क्लेव धर्मशाला में, ऊर्जा तथा खाद्य प्रसंस्करण के लिए शिमला में, निर्माण व फार्मा के लिए बद्दी में, स्वास्थ्य देखभाल आयुष सूचना
प्रौद्योगिकी व इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए मंडी में जबकि साहसिक पर्यटन व लघु उद्योगों के लिए मनाली का चयन किया गया है। इसके अलावा देश के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में छह रोड शो आयोजित किए जाएंगे।