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Himachal News: सीएसआर फंड में 100 करोड़ रुपये की कमी पर हिमाचल हाईकोर्ट का संज्ञान, तीन साल का ब्योरा तलब

Sat, 25 Apr 2026 10:30 AM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

राज्य में आपदा प्रबंधन और पुनर्वास कार्यों के लिए सीएसआर फंड के आवंटन और उपयोग में भारी अनियमितताओं पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कंपनियों के अनिवार्य सीएसआर खर्च में लगभग 100 करोड़ रुपये की भारी कमी पाई गई है। पढ़ें पूरी खबर...
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में आपदा प्रबंधन और पुनर्वास कार्यों के लिए सीएसआर फंड के आवंटन और उपयोग में भारी अनियमितताओं पर कड़ा संज्ञान लिया है। इसे लेकर कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) फंड के सही उपयोग और पारदर्शिता को लेकर केंद्र सरकार, सार्वजनिक उपक्रमों और सरकार को कड़े निर्देश जारी किए हैं। उद्योग विभाग के विशेष सचिव की ओर से दायर हलफनामे से खुलासा हुआ कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कंपनियों के अनिवार्य सीएसआर खर्च में लगभग 100 करोड़ रुपये की भारी कमी पाई गई है। रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है कि कई कंपनियां अपने कानूनी दायित्वों को पूरा करने में विफल रही हैं। 
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मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई से पहले डिफॉल्टर कंपनियों के खिलाफ कानूनी ढांचे के तहत कार्रवाई शुरू की जाए। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भारत सरकार और राज्य सरकार दोनों पर अनुकरणीय लागत लगाई जा सकती है। अदालत ने मुख्य सचिव को विस्तृत हलफनामा दायर करने का आदेश दिया है, जिसमें पिछले 3 वर्षों में सेक्शन 135 के तहत आने वाली कंपनियों की सूची, उनका खर्च और बकाया फंड बताना होगा। क्या आपदा के बाद पुनर्वास के लिए इस फंड को जुटाने के लिए कोई समान नीति या परिपत्र जारी किया  गया है। 

सड़कों, पुलों, पेयजल योजनाओं, अस्पतालों और स्कूलों जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की जिलावार सूची, जिन्हें सीएसआर फंड से सुधारा जा सकता है। खंडपीठ ने चिंता जताई कि 2023 से 2025 के बीच बार-बार आपदाएं झेलने के बावजूद राज्य के पास कंपनियों के अनुपालन को लेकर सटीक और सत्यापित जानकारी का अभाव है। केंद्र को निर्देश दिया गया है कि वह हिमाचल में प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम (जैसे एनटीपीसी, एनएचपीसी, एसजेवीएन, पावर ग्रिड, और टीएचडीसी) की ओर से किए गए कार्यों और उनके पास बचे खर्च नहीं किए गए सीएसआर फंड की स्थिति पर स्पष्ट हलफनामा दायर करें। यह भी बताना होगा कि 2025 की आपदा के बाद उन्होंने राज्य में आपदा-विशिष्ट कौन से कार्य किए हैं।
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सरकारी कर्मचारियों के सेवा भर्ती मामले में आज आएगा फैसला
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट शनिवार को सरकारी कर्मचारी भर्ती एवं सेवा शर्त विधेयक 2024 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला देगा। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने 5 जनवरी को फैसला को सुरक्षित रख दिया है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से इस अधिनियम को खारिज करने की मांग की है । उनका मानना है कि अधिनियम संविधान में निहित अनुच्छेदों के प्रावधानों के विपरीत है। वहीं सरकार का पक्ष है कि अधिनियम को बनाने का उद्देश्य रेगुलर और अनुबंध कर्मचारियों को अलग अलग करना है। 
 
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