कोर्ट ने कहा कि या तो महाधिवक्ता कार्यालय से सरकार तक कोर्ट के आदेश नहीं पहुंच रहे या संबंधित अधिकारी कोर्ट को हल्के में ले रहे हैं। कोर्ट ने सरकारी अधिकारियों के रवैये पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि हाईकोर्ट के आदेशानुसार महाधिवक्ता कार्यालय से जारी निर्देशों को हल्के में लेना वास्तव में हाईकोर्ट को हल्के में लेना माना जाएगा और दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध मजबूरन कड़ी कार्रवाई करनी पड़ेगी।
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया था कि प्रदेश में हर वर्ष तकरीबन दो करोड़ पर्यटक आते हैं। इतने लोगों की मूलभूत जरूरतों को पूरा करने के लिए सड़कों के किनारे पर्याप्त शौचालय तक नहीं हैं। मजबूरन पर्यटकों और अन्य यात्रियों को खुले में शौच जाना पड़ता है।
इससे स्थानीय जल स्रोत और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचता है। खुले में गंदगी करने से गंभीर बीमारियों के फैलने का खतरा भी पैदा हो जाएगा। आने वाले समय मे यह स्थिति भयावह रूप ले लेगी, जिससे निपटने के लिए अभी से तैयारी करनी होगी। मामले पर सुनवाई 11 अप्रैल को होगी।