हिमाचल हाईकोर्ट के फैसले से प्रदेश के हजारों हजारों अवैध भवन मालिकों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। टीसीपी एक्ट के संशोधन को कोर्ट की ओर से निरस्त किए जाने से तीस हजार से अधिक अवैध भवन मालिकों को बड़ा झटका लगा है।
इन तीस हजार भवन मालिकों में से करीब नौ हजार अवैध भवन मालिक तो अपने भवनों के नियमितीकरण करने के लिए नक्शे पास करवाने को आवेदन भी कर चुके हैं। हिमाचल प्रदेश सरकार ने 24 जनवरी, 2017 को हिमाचल प्रदेश टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (संशोधन) अधिनियम 2016 को अधिसूचित किया था।
इस कानून के तहत आए आवेदनों का निपटारा एक साल के भीतर किया जाना था। इसमें जैसा है, जहां है वाली नीति को अपनाते हुए नियमितीकरण करने की योजना थी। ग्रीन और हेरिटेज क्षेत्रों में इस कानून को लागू नहीं किया गया था।
जो भवन इस कानून के तहत नियमितीकरण के पात्र नहीं थे, उनके बिजली-पानी कनेक्शन काटने और भवनों को गिराने का प्रावधान भी किया गया। नियमितीकरण की फीस 400 से 1000 रुपये प्रति वर्ग मीटर निर्धारित की गई थी।