प्रदेश हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय संस्थान के फर्जी प्रमाण पत्रों की धीमी जांच पर पुलिस को फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि यदि मामले की गंभीरता से जांच नहीं की गई को अदालत को मजबूरन एसआईटी गठित करनी पड़ेगी।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय संस्थान के फर्जी प्रमाण पत्रों की धीमी जांच पर पुलिस को फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि यदि मामले की गंभीरता से जांच नहीं की गई को अदालत को मजबूरन एसआईटी गठित करनी पड़ेगी। अदालत ने जांच अधिकारी से दो हफ्ते के भीतर जांच की प्रगति रिपोर्ट तलब की है। मामले की सुनवाई 20 जुलाई को निर्धारित की गई है। अदालत ने इस मामले में पुलिस स्टेशन औट मंडी में दर्ज प्राथमिकी की जांच रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद यह आदेश पारित किए।
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अदालत ने पाया कि इस मामले में संदिग्ध मुख्य आरोपी सुनील कुमार को हाईकोर्ट के आदेशों के बाद गिरफ्तार किया गया और उसे अग्रिम जमानत लेनी पड़ी। इसके बाद अभी भी जांच में कोई गंभीरता नहीं दिखाई दे रही है। राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय संस्थान में फर्जी प्रमाण पत्र से जुड़े मामले में संस्थान के निदेशक ने विवादित प्रमाणपत्र को फर्जी बताया था। अदालत ने संस्थान से पूछा था कि फर्जी प्रमाण पत्र का मामला सामने आने पर क्या कदम उठाए जाते हैं। अदालत को बताया गया था कि ऐसे मामलों में आपराधिक मामला दर्ज किया जाता है।
संस्थान की ओर से कोर्ट को बताया गया कि प्रदेश में उनके 36 आउटलेट हैं। कोर्ट मित्र ने अदालत को बताया कि प्रदेश में जाली शैक्षणिक प्रमाणपत्रों का अवैध कारोबार चल रहा है। नौकरी के साथ साथ पदोन्नति पाने के लिए विभागों में दिए प्रमाण पत्रों की गहराई से जांच होनी चाहिए। विशेष तौर से बाहरी राज्यों के शैक्षणिक संस्थानों के प्रमाणपत्रों की जांच होना जरूरी है जिसे कर्मचारी नौकरी पाने या पदोन्नति के लिए पेश करते हैं। ये सभी फर्जी प्रमाणपत्र अधिकतर दूरवर्ती शिक्षा प्रदान करने वाले संस्थानों से जुड़े होते हैं।