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हिमाचल: विजिलेंस ब्यूरो को आरटीआई के दायरे से बाहर करने की अधिसूचना पर हाईकोर्ट की रोक

Thu, 21 May 2026 09:47 AM IST
Krishan Singh भारती मेहता, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

विजिलेंस को सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के दायरे से बाहर करने की राज्य सरकार की अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी है।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो (विजिलेंस) को सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के दायरे से बाहर करने की राज्य सरकार की अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी है। राज्य सरकार ने इसे लेकर 12 मार्च को अधिसूचना जारी की थी। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने मामले में सुनवाई करते हुए राज्य सरकार, विजिलेंस ब्यूरो सहित अन्य विभागों को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 24 जून को होगी। गौरतलब है कि वर्ष 2024 में विजिलेंस ब्यूरो में भ्रष्टाचार और झूठे दस्तावेज देने को लेकर एक एफआईआर दर्ज की गई। 

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शिकायतकर्ता ने 15 लोगों के नाम विजिलेंस को दिए, जिसमें से विजिलेंस ने तीन के खिलाफ कार्रवाई की। इसके बाद शिकायतकर्ता ने वर्ष 2025 में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में इसे लेकर एक याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए। अदालत के आदेशों के बाद याचिकाकर्ता ने विजिलेंस ब्यूरो में जांच के स्टेटस को लेकर आरटीआई आवेदन दायर किया। आवेदन के जवाब में विजिलेंस ने 2 मई को एक जवाब दायर किया और बताया कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने 12 मार्च 2026 को विजिलेंस ब्यूरो को आरटीआई के दायरे से बाहर कर दिया है।
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सरकार ने यह दिया था तर्क

इस पर याचिकाकर्ता ने राज्य सरकार के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचिका में बताया गया है कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा (24(4) के तहत भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों या मानवाधिकार के उल्लंघन से जुड़े मामलों में अभी भी जानकारी मांगी जा सकती है। सरकार का यह फैसला आरटीआई कानून का उल्लंघन है। सरकार की ओर से विजिलेंस को आरटीआई के दायरे से बाहर करने के पीछे तर्क दिया गया था कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच के दौरान कई संवेदनशील जानकारियां सामने आती हैं। जांच की गोपनीयता बनाए रखने और जांच प्रक्रिया प्रभावित न हो, इसलिए यह कदम उठाया गया है।
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