शिकायतकर्ता ने 15 लोगों के नाम विजिलेंस को दिए, जिसमें से विजिलेंस ने तीन के खिलाफ कार्रवाई की। इसके बाद शिकायतकर्ता ने वर्ष 2025 में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में इसे लेकर एक याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए। अदालत के आदेशों के बाद याचिकाकर्ता ने विजिलेंस ब्यूरो में जांच के स्टेटस को लेकर आरटीआई आवेदन दायर किया। आवेदन के जवाब में विजिलेंस ने 2 मई को एक जवाब दायर किया और बताया कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने 12 मार्च 2026 को विजिलेंस ब्यूरो को आरटीआई के दायरे से बाहर कर दिया है।
इस पर याचिकाकर्ता ने राज्य सरकार के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचिका में बताया गया है कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा (24(4) के तहत भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों या मानवाधिकार के उल्लंघन से जुड़े मामलों में अभी भी जानकारी मांगी जा सकती है। सरकार का यह फैसला आरटीआई कानून का उल्लंघन है। सरकार की ओर से विजिलेंस को आरटीआई के दायरे से बाहर करने के पीछे तर्क दिया गया था कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच के दौरान कई संवेदनशील जानकारियां सामने आती हैं। जांच की गोपनीयता बनाए रखने और जांच प्रक्रिया प्रभावित न हो, इसलिए यह कदम उठाया गया है।