मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने पाया कि वन संरक्षण अधिनियम (एफसीए) के तहत अनुमति के बाद भी ऐसे नाजुक क्षेत्रों में मोटर योग्य सड़कें बनाई जा रही हैं, जहां स्थानीय आबादी बेहद कम है, लेकिन पर्यटकों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है।
अदालत ने कहा कि चंद्रताल झील, शिकारी देवी मंदिर और चूड़धार मंदिर क्षेत्रों तक वाहनों की सीधी पहुंच से वनों और पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। कोर्ट को बताया गया कि वन विभाग की ओर से चंद्रताल झील के आसपास पर्यटकों को रात में ठहरने और कैंपिंग की अनुमति दी जा रही है। इस पर अदालत ने सवाल उठाया कि वहां उत्पन्न प्लास्टिक कचरे और मानव अपशिष्ट के निपटारे की क्या व्यवस्था है और क्या मोबाइल शौचालय उपलब्ध हैं। कोर्ट ने इन क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरा फैलने पर भी चिंता जताई है।
भुंतर की डंपिंग साइट पर हाईकोर्ट सख्त, डीसी को कचरा हटाने के आदेश
हाईकोर्ट ने कचरा डंपिंग साइट भुंतर की ओवरलोड स्थिति और इससे व्यास नदी को पैदा हो रहे खतरे पर गंभीर चिंता जताई है। न्यायालय ने उपायुक्त के कुल्लू को तत्काल कदम उठाने और डंपिंग साइट से कचरे को उपचार एवं प्रसंस्करण के लिए वैकल्पिक सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान ये आदेश दिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नई कचरा साइट के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाते समय कुल्लू हवाई अड्डे (भुंतर एयरपोर्ट) से उसकी दूरी का विशेष ध्यान रखा जाए। इस संबंध में उपायुक्त कुल्लू को अलग से हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
मानसून में नदी में बह सकता है कचरा
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि डंपिंग साइट पूरी तरह ओवरलोड है। मानसून के कारण यहां डंप किया कचरा व्यास नदी में मिलने का खतरा है। नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए खंडपीठ ने उपायुक्त को भुंतर साइट की स्थिति की जांच करने और वहां जमा कचरे को प्रसंस्करण एवं उपचार के लिए तुरंत वैकल्पिक स्थल पर भेजने की व्यवस्था करने के आदेश दिए।
सराबाई में नई साइट की प्रक्रिया लंबित
विशेष सचिव (शहरी विकास) की ओर से अदालत में दायर हलफनामे से पता चला कि बिजली बोर्ड के स्वामित्व वाली ग्राम पंचायत मसगांव के सराबाई स्थित भूमि को शहरी विकास विभाग को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया अभी लंबित है। यह स्थल व्यास नदी से सुरक्षित दूरी पर बताया गया है। कोर्ट के 30 दिसंबर 2025 के आदेश के तहत इस स्थल के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जानी है। नई साइट के चयन और विकास की प्रक्रिया में एयरपोर्ट से संबंधित सुरक्षा मानकों को भी ध्यान में रखना होगा। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्तूबर को होगी।