अदालत ने कहा कि सरकार अपनी ही शर्तों के आधार पर किसी कर्मचारी को नियुक्ति देने के बाद, उसे बाद की किसी अधिसूचना से वंचित नहीं कर सकती। कोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए सरकार को आदेश दिए हैं कि याचिकाकर्ता को उनके नियुक्ति पत्र 29 सितंबर 2022 की शर्तों के अनुसार एनपीए का बकाया भुगतान तीन महीने के भीतर किया जाए। यदि सरकार तीन महीने के भीतर बकाया राशि का भुगतान करने में विफल रहती है, तो 6 फीसदी की ब्याज दर देनी होगी।
याचिकाकर्ता को 29 सितंबर 2022 को जारी अधिसूचना के तहत पशु चिकित्सा अधिकारी के पद पर नियुक्त किया गया था। उनकी नियुक्ति के समय जो शर्तें तय की गई थीं, उनमें एनपीए शामिल था। हालांकि, अपनी पीएचडी पूरी करने के लिए डॉ. कटवाल ने विभाग से कार्यभार संभालने के लिए विस्तार मांगा, जिसे विभाग ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद, उन्होंने 5 जुलाई 2023 को कार्यभार संभाला।इस बीच, राज्य सरकार के वित्त विभाग ने 24 मई 2023 को एक अधिसूचना जारी की, जिसमें यह कहा गया कि इसके बाद भर्ती होने वाले डॉक्टरों को एनपीए नहीं दिया जाएगा।
सरकार ने इसी अधिसूचना को आधार बनाकर याचिकाकर्ता को एनपीए देने से इन्कार कर दिया था, क्योंकि उन्होंने 24 मई 2023 के बाद ज्वाइन किया था। अदालत में स्पष्ट किया कि डॉ. कटवाल की नियुक्ति 29 सितंबर 2022 को ही हो चुकी थी, जो कि सरकार द्वारा एनपीए बंद करने वाली 24 मई 2023 अधिसूचना से काफी पहले की थी।अदालत ने कहा कि विभाग ने स्वयं याचिकाकर्ता को पीएचडी पूरी करने के लिए समय दिया था और उन्हें उनकी मूल नियुक्ति शर्तों पर ही ज्वाइन करने की अनुमति दी थी।