हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय की एकल पीठ में न्यायाधीश चंद्रभूषण बोरोवालिया की अदालत ने टावर लाइन बिछाने के मामले में रिलायंस इंडस्ट्रीज के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के खिलाफ आपराधिक मुकदमों को स्थगित करने की याचिका को खारिज कर कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
न्यायालय से किसानों के पक्ष में फैसला आने के बाद टावर लाइन शोषित जागरूकता मंच में खुशी की लहर है। अब रिलायंस इंडस्ट्रीज के डायरेक्टर और सहयोगी कंपनी के डायरेक्टर को जांच में सहयोग के लिए सदर और बरमाणा थाना में व्यक्तिगत तौर पर पेश होकर तफ्तीश में शामिल होना पड़ेगा।
टावर लाइन शोषित मंच के राज्य कानूनी सलाहकार अजय नड्डा ने बताया कि यह राहत भरा फैसला करीब साढ़े चार साल बाद आया है। जो पिछली तीनों तारीखों को दोनों पक्षों को सुनने के बाद सुरक्षित कर दिया था। उन्होंने बताया कि 2015 में रिलायंस इंटस्ट्रीज के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर और उसकी सहयोगी कंपनी पार्वती कोलडैम ट्रांसमिशन कंपनी के डायरेक्टर के खिलाफ बिलासपुर में एफआईआर दर्ज करने के आदेश जेएमआईसी कोर्ट ने दिए थे।
उसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। न्यायालय के आदेश और पुलिस की ओर से एफआईआर दर्ज करने के खिलाफ दोनों कंपनियों ने पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए उच्च न्यायालय में एफआईआर रद्द करने के लिए याचिका दायर की थी। याचिका दायर होने के बाद हाईकोर्ट ने पुलिस कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। इसकी वजह से आजतक मामले की छानबीन पुलिस ने नहीं की। अब कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है।
यह था मामला
मंच के प्रदेश संयोजक रजनीश शर्मा का कहना है कि रिलायंस इंटस्ट्रीज की सहयोगी टावर लाइन कंपनी पार्वती कोलडैम ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड की ओर से प्रदेश के चार जिलों की आठ विधानसभा क्षेत्रों में गैरकानूनी तरीके से घरों, मवेशीखानों और मलकीयत जमीन पर टावर लाइन बिछा दी थी।