हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला-परवाणू और शिमला-धर्मशाला नेशनल हाईवे के आसपास अवैध निर्माण को तुरंत हटाने के आदेश जारी किए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस कार्रवाई में बाधक बनने वाले लोगों से सख्ती से निपटा जाए। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने मुख्य सचिव, डीजीपी और लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर इन
चीफ को आदेश दिए कि यदि कोई अवैध निर्माण हटाने के लिए सहायता की मांग करता है तो उन्हें हर संभव मदद प्रदान की जाए। स्पष्ट किया है कि यदि अदालत के आदेशों की कोई भी अवहेलना करता पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने सरकार को आदेश दिए हैं कि वह परवाणू से ढली और शिमला से धर्मशाला नेशनल हाईवे के आसपास अनाधिकृत निर्माण न होने दे और अतिक्रमण को तुरंत हटाए।
प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला के घंडल क्षेत्र में किसी भी प्रकार के निर्माण पर आगामी आदेशों तक तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी है। कोर्ट ने सरकार से उन सभी लोगों की जानकारी मांगी है जो घंडल क्षेत्र में निर्माण कार्य कर रहे हैं। कोर्ट ने इस क्षेत्र में न्यायिक एकेडमी व नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी को देखते सरकार को आदेश दिए हैं वह उक्त क्षेत्र में निर्माण पर प्रतिबंध लगाने के लिए कोई ठोस नीति बनाए।