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हाईकोर्ट ने सीबीआई को सौंपी इस अहम मामले की जांच

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प्रदेश हाईकोर्ट ने टुटू-तारादेवी बाईपास रोड में हुए गोलीकांड से संबंधित पुलिस की ओर से दर्ज प्राथमिकी की जांच सीबीआई को सौंप दी है। न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर की खंडपीठ ने सीबीआई के आवेदन पर यह जांच सौंपी। सीबीआई के अनुसार इस गोलीकांड में घायल युवक की ओर से दायर प्राथमिकी और पुलिस की ओर से दर्ज प्राथमिकी को ओवर लैप कर रखा है। घटना एक ही समय में घटित हुई थी। कोर्ट ने सीबीआई को तीन माह के भीतर जांच पूरा करने के आदेश जारी किए।
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मामले के अनुसार नौ जनवरी 2013 की रात टुटू-तारादेवी बाईपास सड़क पर पुलिस की ओर से कथित तौर पर गोली चलाई गई। इसमें एक युवक उदयवीर सिंह पंवर की मौत हो गई थी। वारदात के समय दो युवक अपनी जब्त की गई गाड़ी को देखने गए थे। दो पुलिस कर्मियों व युवकों में कुछ झड़प हुई। इसके बाद एक पुलिस वाले ने गोली चला दी।

इस घटना में एक युवक मारा गया और दूसरा घायल हो गया। मामले में यह भी बताया गया कि पुलिस ने जानबूझ कर गोली लगे युवक को देरी से अस्पताल पहुंचाया, जिससे उसकी मौत हो गई। हाईकोर्ट ने मृतक युवक की माता कमला पंवर की याचिका का निपटारा करते हुए युवकों की ओर से दर्ज प्राथमिकी की जांच सीबीआई से करवाने के आदेश जारी किए थे।
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कमला पंवर को इसलिए याचिका दायर करनी पड़ी कि क्योंकि पुलिस की ओर से इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट तक निचली अदालत के समक्ष पेश कर दी थी। कोर्ट ने कहा कि पुलिस ही पुलिस की जांच कर रही है, इससे आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच संभव नहीं है।

हटाने पड़ेंगे सोलन गुरुद्वारे से लेकर चंबाघाट तक अवैध खोखे

प्रदेश हाईकोर्ट ने रेहड़ी फड़ी विकास संगठन सोलन के उस आवेदन को खारिज कर दिया जिसके तहत उन्होंने हाईकोर्ट के आदेशों में संशोधन की मांग की थी। गौर हो कि गत 26 नवंबर को हाईकोर्ट ने जिलाधीश सोलन को आदेश दिए थे कि सोलन स्थित गुरुद्वारे से चंबाघाट तक नेशनल हाईवे पर जितने भी खोखे और ढांचे अवैध तरीके से बना रखे हैं, उनको 4 सप्ताह के भीतर हटाया जाए।

इसके अलावा न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर की खंडपीठ ने जिलाधीश सोलन को कहा है कि हटाये गए लोगों को इस तरह के खोखे स्थापित करने के लिए परमिट न जारी किए जाएं। स्थानीय अधिवक्ता एनके ठाकुर द्वारा दायर याचिका में यह आरोप लगाया गया था कि सोलन में गुरुद्वारे से लेकर चंबाघाट तक कमीशन एजेंटों और व्यापारियों ने अवैध तरीके से अस्थायी ढांचे स्थापित कर रखे हैं। जो हाईवे से गुजरने वाले यातायात के लिए लंबे समय से मुश्किल पैदा करते आ रहे हैं। याचिकाकर्ता ने इन ढांचों को हटाने की गुहार लगाई थी।

रेहड़ी फड़ी विकास संगठन द्वारा दायर आवेदन में दलील दी गई थी कि स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट के तहत उन्हें नगर परिषद सोलन की ओर से सड़क किनारे अपना व्यवसाय चलाने के लिए लाइसेंस मुहैया करवाया गया है। वे बीते 10 साल से अधिक समय से वहां पर अपना व्यवसाय चला रहे हैं। इन्होंने गुहार लगाई थी कि जब तक उन्हें नया स्थान मुहैया नहीं करवाया जाता तब तक उन्हें वहीं व्यवसाय चलाने की इजाजत दी जाए।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उनके द्वारा मामले में प्रतिवादी बनने के लिए कोई ठोस कारण नहीं दिया गया है, जिसके तहत मामले के निपटारे के बाद उन्हें प्रतिवादी बनाया जाए। उल्लेखनीय है कि फ्रूट एंड वेजिटेबल मर्चेंट एसोसिएशन सब्जी मंडी सोलन पहले ही इस मामले में अपना पक्ष बतौर प्रतिवादी रख चुका है।
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दस मार्च तक टली एचपीसीए पदाधिकारियों की सुनवाई

एचपीसीए के पदाधिकारियों के खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार से संबंधित मामले पर सुनवाई दस मार्च तक के लिए टल गई है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने पहले अनुराग ठाकुर के खिलाफ विशेष न्यायाधीश कांगड़ा (धर्मशाला) की अदालत के समक्ष लंबित आपराधिक मामले पर रोक लगा दी थी। शुक्रवार को कोर्ट ने एचपीसीए के पीआरओ संजय के खिलाफ भी इस मामले से संबंधित चल रही कार्यवाही पर रोक लगा दी।

इस मामले में एचपीसीए ने राज्य सरकार के अधिकारियों से मिलीभगत कर सरकारी जमीन पर बने भवन को गिराया और उस पर नाजायज कब्जा कर होटल बनाया। इसे लेकर तीन अक्तूबर 2013 को एचपीसीए के पदाधिकारियों और अनुराग ठाकुर के खिलाफ सतर्कता विभाग कांगड़ा (धर्मशाला) के समक्ष आपराधिक मामला दर्ज किया गया।

14 नवंबर 2014 को अभियोजन पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ विशेष न्यायाधीश कांगड़ा (धर्र्मशाला) की अदालत के समक्ष चालान किया था। एचपीसीए के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और पदाधिकारियों ने अपनी याचिका में यह आरोप लगाया कि उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी झूठी है।

उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं। राजनीतिक द्वेष के चलते उन्हें परेशान किया जा रहा है। इस मामले में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को निजी तौर पर प्रतिवादी बनाया गया है। लेकिन फिलहाल कोर्ट ने उन्हें नोटिस जारी नहीं किया है। मामले पर सुनवाई 10 मार्च को होगी।

हिमाचल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े दावों के मामलों में 56,60,830 रुपये का मुआवजा दिलाया। मोटर दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल के आदेश के खिलाफ दायर की गई वर्ष 2008 और 2009 की 19 अपीलों का निपटारा करते हुए मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर ने यह क्षतिपूर्ति हर्जाना पीड़ितों व उनके आश्रितों को प्रदान किया।
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