मुख्य संसदीय सचिवों (सीपीएस) की नियुक्तियों पर हिमाचल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस भेजकर एक सप्ताह में जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने बुधवार को पीपल फॉर रिस्पांसिबल गवर्नेंस की याचिका पर सुनवाई कर सरकार को नोटिस भेजा।
कोर्ट ने प्रार्थी संस्था से याचिका की मेंटेनबिलिटी को साबित करने के लिए भी कहा है। मामले पर अगली सुनवाई अब आठ दिसंबर को होगी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 में संशोधन के मुताबिक किसी भी प्रदेश में मंत्रियों की
संख्या विधायकों की कुल संख्या का 15 फीसदी से अधिक नहीं हो सकती। लेकिन हिमाचल में सीपीएस की नियुक्तियों से संविधान का उल्लंघन हुआ है। लिहाजा, सीपीएस की नियुक्तियों को रद्द किया जाना चाहिए। प्रार्थी संस्था का कहना है कि सीपीएस को मंत्री के बराबर टीए, डीए, मेडिकल सुविधा दी जाती है।