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सीपीएस की नियुक्तियों पर सरकार को हाईकोर्ट का नोटिस

Thu, 01 Dec 2016 10:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल हाईकोर्ट
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मुख्य संसदीय सचिवों (सीपीएस) की नियुक्तियों पर हिमाचल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस भेजकर एक सप्ताह में जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने बुधवार को पीपल फॉर रिस्पांसिबल गवर्नेंस की याचिका पर सुनवाई कर सरकार को नोटिस भेजा। 
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कोर्ट ने प्रार्थी संस्था से याचिका की मेंटेनबिलिटी को साबित करने के लिए भी कहा है। मामले पर अगली सुनवाई अब आठ दिसंबर को होगी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 में संशोधन के मुताबिक किसी भी प्रदेश में मंत्रियों की

संख्या विधायकों की कुल संख्या का 15 फीसदी से अधिक नहीं हो सकती। लेकिन हिमाचल में सीपीएस की नियुक्तियों से संविधान का उल्लंघन हुआ है। लिहाजा, सीपीएस की नियुक्तियों को रद्द किया जाना चाहिए। प्रार्थी संस्था का कहना है कि सीपीएस को मंत्री के बराबर टीए, डीए, मेडिकल सुविधा दी जाती है। 
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कब, किस सीपीएस की नियुक्ति

हिमाचल प्रदेश सरकार
इससे सरकारी कोष पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है। दलील दी है कि 18 अगस्त 2005 को प्रदेश हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश वीके गुप्ता व न्यायाधीश दीपक गुप्ता की खंडपीठ ने मुख्य संसदीय सचिवों और संसदीय सचिवों की नियुक्ति को संविधान के प्रावधानों के विपरीत पाते हुए रद्द कर दिया था। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट भी 12 अगस्त 2016 को संसदीय सचिवों की नियुक्तियां रद्द कर चुका है। 

22 जनवरी 2013 को नीरज भारती, राजेश धर्माणी और विनय कुमार जबकि 13 मई 2013 को जगजीवन पाल, राकेश कालिया, नंद लाल, रोहित ठाकुर, सोहन लाल ठाकुर, इंद्र दत्त लखनपाल और 22 अक्तूबर को मनसा राम को सीपीएस नियुक्त किया गया है। 
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