प्रदेश उच्च न्यायालय में अश्विनी कुमार की ओर से दिए प्रतिवेदन पर लोक निर्माण विभाग ने अपना निर्णय देने के आदेश पारित किए थे, मगर लोक निर्माण विभाग ने प्रार्थी के प्रतिवेदन को यह कहकर खारिज कर दिया था कि एक अप्रैल 2001 से चतुर्थ और तृतीय श्रेणी के कर्मियों के लिए वर्कचार्ज व्यवस्था खत्म हो चुकी है।
इस कारण से आठ साल के बाद वर्कचार्ज स्टेटस का लाभ नहीं दिया जा सकता। प्रार्थी ने इस आदेश को ट्रिब्यूनल के समक्ष याचिका के माध्यम से चुनौती दी। ट्रिब्यूनल ने प्रार्थी के क्लेम को जायज पाते हुए आदेश दिए कि उसे आठ साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद वर्कचार्ज स्टेटस दिया जाए।
राज्य सरकार ने इस आदेश को हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के फैसले में कोई भी खामी न पाते हुए प्रार्थी के मामले को आठ वर्ष के बाद वर्कचार्ज स्टेटस दिए जाने के लिए आदेश पारित कर दिए।