प्रदेश सरकार ने बाहरी राज्यों से पढ़ाई करने वाले हिमाचली छात्रों को दो श्रेणियों में बांटा है। पहली श्रेणी में वे छात्र हैं जिनके अभिभावक बाहरी राज्यों अथवा केंद्र सरकार के अधीन सरकारी नौकरी में हैं या कभी रहे थे। दूसरी श्रेणी में वो छात्र हैं जिनके अभिभावक निजी क्षेत्र में कार्यरत हैं या कभी रहे थे। अभिभावकों की राज्य से बाहर नौकरी या व्यवसाय होने के कारण यह छात्र हिमाचल प्रदेश के किसी स्कूल से जरूरी दो कक्षाएं पास नहीं कर सके।
एमबीबीएस कोर्स के लिए प्रदेश के कोटे के तहत यह शर्त है कि छात्र ने कम से कम दो चुनिंदा कक्षायें हिमाचल के स्कूलों से पास की हों। सरकार ने मौजूदा सत्र में पहली श्रेणी के छात्रों को इस शर्त से छूट दी लेकिन दूसरी श्रेणी के छात्रों को इस छूट का कोई लाभ नहीं दिया गया। दूसरी श्रेणी के कुछ छात्रों ने इस छूट का लाभ मांगते हुए कहा कि उनके साथ सरकार भेदभाव कर रही है।
न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी ने अपने निर्णय में कहा कि दूसरी श्रेणी को छूट का लाभ देना या न देना सरकार के विवेक पर निर्भर करता है जबकि न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर ने न्यायाधीश धर्म चन्द चौधरी के इस मुद्दे पर दिए निर्णय पर असहमति जताते हुए कहा कि सरकार ने गलत ढंग से दूसरी श्रेणी के छात्रों को उपरोक्त छूट देने से मना किया अत: यह असंवैधानिक है।
खंडपीठ ने इस मुद्दे पर विरोधाभासी निर्णय होने के कारण फैसला तीसरे जज के निर्णय के लिए भेजने के आदेश दिए। बता दें कि शैक्षणिक सत्र 2013-14 से लेकर 2017-18 तक दोनों तरह की श्रेणियों के छात्रों को दाखिले में छूट दी गई थी जबकि इस बार दूसरी श्रेणी को यह छूट नहीं दी जा रही है।