विश्वविद्यालय में प्रवेश न दिए जाने के मामले में प्रदेश हाईकोर्ट ने दृष्टि बाधित छात्रा इंदु कुमारी के पत्र का कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश ने विश्वविद्यालय को आदेश दिए है कि उसे व उसके जैसे चार अन्य पात्र दिव्यांग छात्रों को 5 प्रतिशत आरक्षण के नए प्रावधान के तहत दाखिला दिया जाएं।
कोर्ट ने पात्र दिव्यांग विद्यार्थियों को आरक्षण के तहत होस्टल में रहने की व्यवस्था के भी आदेश दिए। कोर्ट ने कहा कि विकलांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जाना प्रदेश सरकार की जिम्मेवारी है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मुख्यसचिव एवं विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार से चार दिनों के भीतर जवाब तलब करते हुए आदेश दिए कि विकलांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के उच्च शिक्षा से संबंधित धारा 32 को लागू कराने को उन्होंने क्या कदम उठाए।
उल्लेखनीय है कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल को 21 जुलाई को चंबा की रहने वाली गरीब परिवार की इंदू कुमारी ने पत्र लिखा था कि विश्वविद्यालय के राजनीति विभाग में एमए में उन्हें 5 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान के तहत प्रवेश देने से इनकार किया है। उसने पत्र में कहा कि शिमला के आरकेएमवी से उमंग फाउंडेशन की पूर्ण छात्रवृत्ति पर उसने बीए किया।
अब उसके जीवन में अंधेरा छा गया है क्योंकि वह गरीबी के कारण राज्य से बाहर जा कर पढ़ाई नहीं कर सकती। इस मामले में कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिक्स क्यूरी ने खंडपीठ को बताया की विश्वविद्यालय के अर्थ शास्त्र विभाग ने 40 विद्यार्थियों की कक्षा में किसी भी
विकलांग को आरक्षण के माध्यम से प्रवेश नहीं दिया जिससे जिला सिरमौर के बीपीएल परिवार का विद्यार्थी रविंद्र कुमार दाखिले से वंचित रह गया। बीएड में पालमपुर के दृष्टि बाधित विजय कुमार को धर्मशाला में और मंडी जिले के जितेंद्र कुमार को विश्वविद्यालय परिसर में 5 प्रतिशत आरक्षण के अंतर्गत दाखिला नहीं दिया गया। मामले पर सुनवाई 29 अगस्त को होगी।