हाईकोर्ट में देशराज की अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में पावर काॅरपोरेशन के निलंबित निदेशक देशराज की अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसले को सुरक्षित रख लिया है। राज्य सरकार की ओर से इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट दायर की गई। रिपोर्ट में कहा गया कि दस्तावेज से जुड़ा सारा रिकाॅर्ड खंगाला गया। सरकार की ओर से अदालत से अपील की गई कि अग्रिम जमानत याचिका को खारिज किया जाए। वहीं याचिकाकर्ता देशराज की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि इन्हें गलत तरीके से फंसाया जा रहा है। याचिकाकर्ता 4 तारीख के बाद विमल नेगी से कभी नहीं मिला, बल्कि जब उन्हें पता चला तो विमल की तलाश के लिए अपने अधिकारियों को भेजा।
दलीलों में कहा गया कि अगर वह बड़े अधिकारियों से परेशान थे तो उन्हें पुलिस में शिकायत करनी चाहिए थी। दूसरी ओर, परिवार की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि आत्महत्या के लिए केवल शारीरिक मौजूदगी ही काफी नहीं होती। अधिकारियों ने उन पर दबाव बनाया, जो कार्यालय की डायरी एंट्री से पता चलता है। विमल नेगी को रात के दो-दो बजे तक कार्यालय में बिठाया जाता था। विमल नेगी की मौत मामले में परिजनों ने देशराज और हरिकेश मीणा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का मानना है कि इन दोनों अधिकारियों की ओर से विमल नेगी को गलत काम करने के लिए उकसाया जा रहा था और उन पर दबाव बनाया जा रहा था। उनकी मौत नदी में कूदने से नहीं, बल्कि उनकी मौत सोची समझी रणनीति के तहत हुई है।