हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सड़क हादसे में जान गंवाने वाले युवा वकील के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अस्थायी रजिस्ट्रेशन की अवधि समाप्त होने के बाद बिना वैध पंजीकरण प्रमाणपत्र (आरसी) के सार्वजनिक सड़क पर वाहन चलाना मोटर वाहन अधिनियम का गंभीर उल्लंघन और बीमा पॉलिसी की शर्तों का मूलभूत उल्लंघन है। हालांकि, पीड़ित परिवार को राहत देते हुए हाईकोर्ट ने मुआवजे की राशि 72.67 लाख रुपये से बढ़ाकर लगभग 1.01 करोड़ रुपये कर दी है।
कोर्ट ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया है कि वह पहले दावेदार को मुआवजे का भुगतान करे और बाद में पे एंड रिकवर के तहत यह राशि गाड़ी की मालकिन से वसूल करे। न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की अदालत ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी की ओर से 2014 में दायर अपील और मृतक की मां द्वारा दायर क्रॉस-ऑब्जेक्शन पर सुनवाई करते हुए मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण चंबा के 2013 के आदेश में संशोधन किया। उल्लेखनीय है कि 22 जुलाई 2011 को खजियार-डलहौजी मार्ग पर दैनकुंड नाले के पास एक कार अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई। कार में सवार 27 वर्षीय अंकित महाजन मौके पर ही मौत हो गई।
वह मुंबई की प्रसिद्ध लॉ फर्म में वकील थे। वाहन 10 जून 2011 को खरीदा गया था और इसका अस्थायी रजिस्ट्रेशन 9 जुलाई 2011 को समाप्त हो चुका था। 22 जुलाई (हादसे के दिन) तक वाहन का स्थायी पंजीकरण नहीं हुआ था। हालांकि वाहन स्वामी ने 19 जुलाई को आरएलए (आरएलए) चंबा में दस्तावेज जमा कराए थे। ट्रिब्यूनल ने मृतक की मां को 72,67,700 रुपये का मुआवजा मंजूर किया था और पूरी देनदारी बीमा कंपनी पर डाली थी।