केंद्रीय वेतनमान की आस में बैठक हिमाचल के बड़े कर्मचारी वर्ग को जयराम सरकार के बजट से निराशा ही हाथ लगी। सरकार ने भले ही उन्हें चार फीसदी महंगाई भत्ते की किस्त देने की घोषणा कर राहत देने की कोशिश की हो, लेकिन उन्हें वार्षिक बजट से केंद्रीय वेतनमान लागू करने की आस थी।
प्रदेश के कर्मचारी संगठन सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि हिमाचल भी केंद्रीय वेतनमान लागू किया जाए। वर्तमान में सरकार पंजाब का अनुसरण करते हुए कर्मचारियों को संशोधित वेतनमान देती रही है। अब दलील दी जा रही है कि अब जबकि हिमाचल अलग राज्य है तो फिर पंजाब का अनुसरण करना उचित नहीं है।
हालांकि, प्रदेश सरकार अपने कर्मचारियों को पंजाब की तर्ज पर वेतनमान तो देती ही है, परंतु अन्य भत्ते सरकार स्वयं समय-समय पर देती है। प्रदेश के कर्मचारियों को अभी तक संशोधित वेतनमान नहीं दिए जा सके हैं।
इसकी एवज में सरकार कर्मचारियों को 21 फीसदी अंतरिम राहत दे रही है। यह बाद में एरियर में से काटी जानी है। संशोधित वेतनमान में विलंब को देखते हुए कर्मचारी केंद्रीय वेतनमान से जोड़ने की बात लंबे समय से कह रहे हैं।
क्या कहते हैं महासंघ नेता
प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ तदर्थ कमेटी अध्यक्ष विनोद कुमार कहते हैं कि नए बजट से मायूसी हुई है, क्योंकि प्रदेश के कर्मचारियों को केंद्रीय वेतनमान से जोड़ने की बात नहीं कही गई। महासंघ लंबे समय से कर्मचारियों को केंद्रीय वेतनमान से जोड़ने की बात कहते रहैं हैं। इस दिशा में कर्मचारियों को मायूसी हाथ लगी है। देश के कई अन्य राज्यों को सरकार केंद्रीय वेतनमान से जोड़ा गया है।