फसलों को बंदरों से बचाने के लिए सोलर फेंसिंग बेहद कारगर साबित हुई है। हालांकि, प्रदेश के निचले इलाकों में आवारा पशुओं की परेशानी में यह कम कारगर है। इसलिए वहां सोलर और चेन फेंसिंग लगाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।कृषि मंत्री रामलाल मारकंडा ने नूरपुर से विधायक राकेश पठानिया के सवाल पर यह जानकारी दी। मंत्री ने बताया कि ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर ही अब चार फीट तक सामान्य फेंसिंग और उसके बाद ऊपर के दो फीट के लिए सोलन फेंसिंग लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
यह भी पढ़ें:
भवनों का निर्माण पूरा होने से पहले उद्घाटन की परंपरा को खत्म करेंगे: सीएम
इसके प्रचार-प्रसार को और प्रयास किए जाएंगे। इससे पहले विधायक राकेश पठानिया ने सोलन फेंसिंग का काम करने वाली कंपनियों के बीच में काम छोड़कर भागने पर चिंता जताई। मंत्री ने कहा कि ऐसी कंपनियों पर ब्लैकलिस्ट करने के साथ जुर्माना लगाने का प्रावधान है।उनसे किसानों के हिस्से की राशि वसूलने की प्रक्रिया भी अपनाई जाती है। इससे पहले मंत्री ने बताया कि लवली सोलन एनर्जी को फेंसिंग के दिए गए कार्यों में से 90 फीसदी अधूरे हैं।
यह भी पढ़ें:
हिमाचल विधानसभा सत्र: इस मुद्दे पर सदन में जमकर हुआ हंगामा
उन्होंने यह भी कहा कि कई काम किसानों के पैसे न देने और काम न कराने की वजह से नहीं हो पाए हैं। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना के ज्यादा-प्रचार पर जोर दिया। मांग की कि सोलर और अन्य तरह की फेंसिंग में दी जाने वाली सब्सिडी को बराबर किया जाए। विधायक कर्नल इंद्र सिंह और लखविंद्र राणा ने भी योजना को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की।