हिमाचल में साल 2030 तक दो लाख हेक्टेयर वन भूमि पर पौधे लगाए जाएंगे। सरकार ने प्रदेश के 30 प्रतिशत भाग को वनों के अधीन लाने का लक्ष्य रखा है। गैर सरकारी सदस्य कार्य दिवस पर विधायक सुखराम चौधरी द्वारा उठाए गए मामले पर शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने वन मंत्री की गैर मौजूदगी में यह खुलासा किया। उन्होंने बताया कि केंद्र प्रायोजित स्कीम नेशनल मिशन फॉर ग्रीन इंडिया के तहत आठ वर्षों के लिए 238 करोड़ रुपये की योजना बनाकर भारत सरकार की स्वीकृति के लिए भेजी गई है।
भारद्वाज ने बताया कि प्रदेश में वृक्षावरण को बढ़ाकर कुल भौगोलिक क्षेत्र के 35 प्रतिशत भाग को वनों के अधीन लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वर्तमान में वन क्षेत्र 27.12 प्रतिशत है। हर साल विभिन्न योजनाओं के तहत नौ हजार हेक्टेयर वन भूमि में पौधरोपण किया जाता है। साल 2030 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रति वर्ष 12 हजार हेक्टेयर वन भूमि पर पौधरोपण किया जाना अपेक्षित है। इसके लिए अतिरिक्त वित्तीय स्रोत तलाशने होंगे।
उन्होंने बताया कि पौधरोपण में उगाए जाने वाले पौधों का स्तर उन्नत किया जा रहा है। विभाग ने पौधरोपण में लंबे पौधे लगाने की प्रक्रिया इस साल से शुरू की है। पौधरोपण को प्रोत्साहन देने के लिए विभिन्न योजनाएं भी शुरू की हैं। इसके तहत पुरस्कार देने का प्रावधान किया गया है। सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करने के प्रयास जारी हैं। इस साल 1.18 लोगों के सहयोग से 26 लाख से ज्यादा पौधे रोपे गए हैं।
इससे पूर्व विधायक सुखराम चौधरी ने हजारों हेक्टेयर खाली पड़ी वन भूमि पर एक मुश्त कार्य योजनावार पौधरोपण की नीति बनाने को लेकर संकल्प रखा। उन्होंने कहा कि जिस रफ्तार से पौधरोपण हो रहा है, उससे सौ साल में भी हम खाली भूमि पर पौधे नहीं लगा सकेंगे। उन्होंने सारी खाली वन भूमि पर एक साथ पौधे रोपने की मांग की। विधायक जवाहर ठाकुर ने पौधरोपण के साथ-साथ वनों को आग से बचाने के लिए अभियान चलाने की बात कही।