प्रदेश में एक जून से मछली आखेट पर पूरी तरह प्रतिबंध लगने से मछुआरों को रोजी-रोटी की चिंता सताने लगी है। सरकार ने इन मछुआरों को बंद सीजन राहत भत्ता देने का फैसला किया है। दो महीनों में प्रति मछुआरे को तीन हजार की राहत राशि दी जाएगी। इस वित्त वर्ष प्रदेश में पहली बार यह तोहफा दिया जाएगा। इससे प्रदेश के जलाशयों, नदी, नालों और उनकी सहायक खड्डों से मछलियां पकड़ने वाले करीब 10 हजार 500 मछुआरों को लाभ होगा।
प्रदेश के प्रमुख जलाशयों गोबिंदसागर, चमेरा बांध, कोलडैम, पौंग और रणजीत बांध में करीब 5000 मछुआरे मछलियों का शिकार कर रोजी-रोटी चलाते हैं। उन्हें इस योजना से राहत मिलेगी। हर साल मछलियों के प्रजनन के चलते दो माह तक मत्स्य आखेट पर प्रतिबंध लगता है। इस कारण मछुआरों को दो माह तक आर्थिक कठिनाइयों से गुजरना पड़ता है।
ऐसे में विभाग ने दो माह की अवधि के दौरान तीन हजार की राशि देने का निर्णय लिया है। उधर, मत्स्य मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि प्रदेश के मछुआरों को अपनी आजीविका के लिए और लोगों को प्रोटीनयुक्त आहार के लिए मछली मिले इसके लिए मत्स्य धन का संरक्षण बहुत जरूरी है। मछुआरों को दो माह में बहुत परेशानी न हो, इसके लिए उन्हें इस अवधि में तीन हजार रुपये प्रति मछुआरे को राहत राशि प्रदान की जाएगी।