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दो निगमों के झगड़े के बीच सरकार का यू टर्न, मंत्री के प्लान को झटका

Wed, 11 Jul 2018 01:00 PM IST
सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला
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करोड़ों रुपये के थोक पाइप खरीद मामले में दो निगमों के झगडे़ के बीच जयराम सरकार को यू टर्न लेना पड़ा है। इससे आईपीएच मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर के गैर जरूरी विभागीय खर्र्च घटाने के प्लान को झटका लगा है। मंत्री ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम से पाइप खरीद का काम वापस लेकर अपने ही बागवानी महकमे से संबद्ध एग्रो इंडस्ट्री कारपोरेशन (हिम एग्रो) को दिया।

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नागरिक आपूर्ति निगम ने इसका विरोध किया। आखिर सरकार बैकफुट पर आ गई। अब यह काम पूर्ववत नागरिक आपूर्ति निगम को ही दिया गया है। नागरिक  आपूर्ति निगम पाइप ढुलाई पर आईपीएच विभाग से दो फीसदी कमीशन लेता है। अधिकारियों से चर्चा कर आईपीएच के अलावा बागवानी महकमा देख रहे मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने यह काम हिम एग्रो को दिलाया।

हिम एग्रो करीब डेढ़ फीसदी कमीशन पर खरीद को तैयार हो गया। खरीदकर पाइप तय स्थान तक पहुंचाने होते हैं। सूत्रों ने बताया कि इसके बाद करीब डेढ़ सौ करोड़ रुपये के पाइप की खरीद प्रक्रिया शुरू हुई। प्रदेश में पाइपों की बड़ी कमी चल रही है। पुराने पाइपों से लीकेज हो रही है। इनकी जगह नए पाइप लगाने हैं। नए कनेक्शन भी देने हैं, मगर अब पाइप खरीद प्रक्रिया फिर लेट हो गई है

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सीएम के पास मामला पहुंचने पर एकमत हुए उच्च अधिकारी

मामला सीएम जयराम ठाकुर के पास पहुंचा। फिर मुख्य सचिव ने उच्च अधिकारियों की बैठक ली। चर्चा हुई कि पहले भी विवादित रह चुके हिम एग्रो की माली हालत पतली है। पेयजल आपूर्ति पर सरकार की पहले ही किरकिरी हो चुकी है। कोई जोखिम उठाना ठीक नहीं।

सहमति बनी कि नागरिक आपूर्ति निगम से ही पूर्ववत दो फीसदी कमीशन पर खरीद करवाना सही रहेगा। सचिव आईपीएच देवेश कुमार ने यह माना कि मुख्य सचिव के पास एक बैठक जरूर हुई है। उन्होंने फैसले पर टिप्पणी नहीं की। 

विभाग की बचत का सोचा था- आईपीएच मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि हमने नागरिक आपूर्ति निगम को कह दिया है कि वह दो प्रतिशत के बजाय डेढ़ फीसदी कमीशन पर ही हमें पाइपें उपलब्ध करवाए। हिम एग्रो को काम देने का भी यही मतलब था कि इससे आईपीएच विभाग की बचत होनी थी। हम आपूर्ति निगम को भी डेढ़ प्रतिशत से ज्यादा कमीशन नहीं देंगे।
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