मामला सीएम जयराम ठाकुर के पास पहुंचा। फिर मुख्य सचिव ने उच्च अधिकारियों की बैठक ली। चर्चा हुई कि पहले भी विवादित रह चुके हिम एग्रो की माली हालत पतली है। पेयजल आपूर्ति पर सरकार की पहले ही किरकिरी हो चुकी है। कोई जोखिम उठाना ठीक नहीं।
सहमति बनी कि नागरिक आपूर्ति निगम से ही पूर्ववत दो फीसदी कमीशन पर खरीद करवाना सही रहेगा। सचिव आईपीएच देवेश कुमार ने यह माना कि मुख्य सचिव के पास एक बैठक जरूर हुई है। उन्होंने फैसले पर टिप्पणी नहीं की।
विभाग की बचत का सोचा था- आईपीएच मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि हमने नागरिक आपूर्ति निगम को कह दिया है कि वह दो प्रतिशत के बजाय डेढ़ फीसदी कमीशन पर ही हमें पाइपें उपलब्ध करवाए। हिम एग्रो को काम देने का भी यही मतलब था कि इससे आईपीएच विभाग की बचत होनी थी। हम आपूर्ति निगम को भी डेढ़ प्रतिशत से ज्यादा कमीशन नहीं देंगे।