शिक्षा मंत्री ने कहा कि भाजपा के दृष्टि पत्र की घोषणा को पूरा करते हुए सरकार ने रूसा के तहत सेमेस्टर सिस्टम को समाप्त कर दिया है। रूसा में बदलाव के लिए बीते दिनों सरकार ने एचपीयू के पूर्व कुलपति सुनील गुप्ता की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया था।
कमेटी की सिफारिशों पर बुधवार को कैबिनेट बैठक में चर्चा की गई। कैबिनेट ने कमेटी की सिफारिशों को लागू करने का फैसला लिया है। उन्हाेेंने बताया कि छात्र संगठनों, शिक्षक संगठनों से चर्चा करने के बाद सरकार ने यह बदलाव किया है।
उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार ने जल्दबाजी में रूसा को लागू किया था। रूसा के तहत पहले से पढ़ाई कर रहे बीए, बीएसई और बीकॉम के विद्यार्थियों की परीक्षाएं सेमेस्टर सिस्टम के तहत ही होंगी।
इन्हें वार्षिक परीक्षा प्रणाली में नहीं लौटाया जाएगा। सिर्फ कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले नए विद्यार्थियों पर नई व्यवस्था लागू होगी, उसके बाद यह व्यवस्था अगली कक्षाओं में भी सुचारु चलेगी।
प्रदेश सरकार ने कॉलेजों में पंद्रह जून से प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने का शेड्यूल जारी किया है। अब नई परीक्षा प्रणाली के तहत क्या पुराने शेड्यूल के तहत ही प्रवेश मिलेगा या नया शेड्यूल जारी होगा। इस पर शिक्षा मंत्री ने बताया कि जल्द इस पर स्थिति स्पष्ट की जाएगी।
वर्ष 2013 में पूर्व कांग्रेस सरकार ने रूसा के तहत सीबीसीएस को यूजी में लागू किया था। कॉलेजों में इसके लिए न पर्याप्त शिक्षक थे, न क्लास रूम और न गैर शिक्षक स्टाफ। नए सिस्टम को समझने में शिक्षकों तक को भी समय लगा।
रूसा के सीबीसीएस के तहत चुने जाने वाले विषयों की च्वाइस को भी कम किया गया। बार-बार मूल्यांकन की प्रक्रिया बदली, फिर भी परीक्षा परिणाम आने में पांच से आठ माह का समय लग गया।
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता नरेश चौहान ने कहा है कि भाजपा की कथनी और करनी मेें फर्क है। भाजपा युवाओें से रूसा सिस्टम खत्म करने की बातें करती रही। मगर आज केवल सेमेस्टर सिस्टम ही खत्म किया गया है।
उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण देखिए कि पिछली बार जब भाजपा विपक्ष में थी तो उस वक्त विपक्ष के नेता प्रेम कुमार धूमल का स्टैंड कुछ और था। उन्होंने इसे खत्म करने की बात की थी। शिक्षा मंत्री का भी यही बयान था।
ये अपने बयान पर स्टैंड नहीं रख रहे हैं। ये वोट की राजनीति है कि रूसा लागू रहेगा और केवल सेमेस्टर सिस्टम खत्म करेंगे। जबकि स्वर्णिम दृष्टिपत्र मेें वायदा कुछ और किया गया है।
इसे कांग्रेस ने अप्लाई किया था। लंबे समय में इसके फायदे होने थे। क्लस्टर विश्वविद्यालय बनने थे। शुरुआती दौर में कुछ दिक्कतें थीं, वह हमने स्पष्ट भी कर दी थीं।
माकपा के राज्य सचिवालय सदस्य संजय चौहान ने कहा है कि रूसा बुनियादी बीमारी है। कॉलेजों में सेमेस्टर सिस्टम को समाप्त करने से यह बीमारी दूर नहीं होगी।
प्रदेश सरकार को अपने चुनावी दृष्टि पत्र और विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान किए गए वायदे को पूरा करते हुए रूसा को समाप्त करना चाहिए। माकपा नेता ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में बदलाव करने से बात नहीं बनेगी। सरकार प्रदेश की जनता से धोखाधड़ी कर रही है।
झूठे वायदे कर भाजपा ने चुनाव जीता है। अब वायदे पूरे करने के समय टुकड़ों में घोषणाओं को पूरा किया जा रहा है। माकपा इसका पुरजोर विरोध करेगी। उन्होंने प्रदेश सरकार से शिक्षा के बजट में बढ़ोतरी करते हुए रूसा को पूरी तरह से समाप्त करने की मांग की है।