स्नातक के छठे सेमेस्टर के अंग्रेजी विषय के पाठ्यक्रम में राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत पढ़ाए जा रहे आंदोलनकारी एवं साहित्यकार ओमप्रकाश वाल्मीकि की उपन्यास की शैली में आत्मकथा ‘जूठन’ में कई शब्दों पर आपत्ति जताई गई है।
साल 2011 में प्रदेश में रूसा के तहत यूजी में अंग्रेजी के छठे सेमेस्टर में ओमप्रकाश वाल्मीकि की आत्मकथा ‘जूठन’ को शामिल किया गया। हिंदी भाषा में लिखी गई जूठन का अंग्रेजी में अरुण प्रभा मुखर्जी ने अनुवाद किया है। पुस्तक में ओमप्रकाश वाल्मीकि के जीवन के अनुभवों को बताया गया है, तो वहीं अनुवाद के बाद भी इस पुस्तक में कई प्रतिबंधित शब्दों का प्रयोग हुआ है।
‘जूठन’ को पाठ्यक्रम से हटाया तो आंदोलन
शिमला। दलित नेता रवि कुमार दलित ने कहा है कि वाल्मीकि समाज और रविदास समाज ने संयुक्त रूप से निर्णय लिया है कि अगर साहित्यकार ओमप्रकाश वाल्मीकि की आत्मकथा ‘जूठन’ को पाठ्यक्रम से हटाया गया तो आंदोलन किया जाएगा। दलित ने कहा कि शिमला में वाल्मीकि समाज और रविदास समाज के लोगों की एक संयुक्त बैठक हुई, जिसमें यह फैसला लिया गया है। बैठक में राजकुमार, विजय कुमार, दया देवी, अनुजा, शांति, दिवेश कुमार, अजय, कविराज, दिलबाग, कुमारी अंजना श्रीधर आदि मौजूद रहे।