बैठक में फैसला लिया गया कि नियमों का सरलीकरण किए जाने से ही कंपनियां हिमाचल में निवेश करेंगी। पर्यटन विभाग की मानें तो फॉरेस्ट क्लीयरेंस और पर्यावरण की स्वीकृति लेने के लिए कंपनियों को महीने लग जाते थे, इस कारण कंपनियां हिमाचल के बजाय दूसरे राज्यों में काम करने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाती थीं।
अतिरिक्त मुख्य सचिव पर्यटन राम सुभग सिंह ने बताया कि कंपनियों को एनओसी दिलाने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है। इसमें वन, पर्यटन, लोनिवि, पर्यावरण के अधिकारियों को शामिल किया गया है। यह कमेटी कंपनियों का पूरी तरह से सहयोग करेगी।