भाजपा सरकार ने सत्ता पाने के लिए अवैध भवनों को नियमित कराने की बात कही थी। हालांकि पूर्व सरकार ने लोगों को राहत देने के लिए एक्ट में संशोधन किया, लेकिन हाईकोर्ट ने इस फैसले को चुनौती दी थी। अब इस मामले में फिर पुनर्विचार याचिका दायर की गई है।
टीसीपी के नियम बहुत पेचीदा हैं। पहले सरकार ने अवैध भवनों में बिजली और पानी के कनेक्शन देने की बात कही, इसमें कहा गया कि जो मंजिल अवैध होगी, उसमें बिजली कनेक्शन नहीं दिया जाएगा। इसकी अधिसूचना भी जारी की गई, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया।
कसौली कांड में अवैध निर्माण को हटाने गई सहायक प्लानर को अपनी जान गंवानी पड़ी। एनजीटी के निर्देशों के चलते यह महिला अवैध निर्माण तोड़ने गई थी।
अनुमानित आंकड़ा
हिमाचल में 30 हजार अवैध भवन
शिमला में सर्वाधिक : 11 हजार
धर्मशाला - 2,000
हमीरपुर - 700
कुल्ल, मनाली - 3,000
बिलासपुर, ऊना, सोलन और मंडी में भी हुआ है अवैध निर्माण
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने हाल ही में कुल्लू का दौरा किया था, वहां पर भी क्षेत्रवासियों ने टीसीपी से बाहर करने की मांग की थी। सचिवालय में इस समय 20 से अधिक पंचायतों के टीसीपी से बाहर करने के आवेदन आए हैं।
10 फीसदी डेविएशन वाले भवन नियमित
सरकार ने नक्शे के बाहर डेविएशन करने वाले भवन मालिकों को बड़ी राहत दी है। हिमाचल में 16 नवंबर, 2017 से पहले 10 फ ीसदी तक के डेविएशन वाले भवन नियमित होंगे।
जिन लोगों ने टीसीपी में भवन बनाने के लिए नक्शा जमा कराया है उन्हें सरकार की ओर से अस्थायी मीटर दिए जा रहे हैं, लेकिन ये मीटर तभी रेगुलर होंगे, जब भवन मालिकों को टीसीपी से कंप्लीशन प्रमाणपत्र मिलेगा।अवैध निर्माण पर सरकार ने ऑनलाइन शिकायतों की व्यवस्था की है। इसमें हिमाचल में हो रहे अवैध निर्माण पर कुछ अंकुश लगा है।
पुनर्विचार याचिका के लिए हिमाचल हाईकोर्ट गई सरकार
हिमाचल में अवैध भवन को नियमित कराने के लिए सरकार ने हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की है। अब कोर्ट को इसमें फैसला लेना है। एनजीटी के ढाई मंजिला भवन के फैसले को भी सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने पर विचार कर रही है।