हालांकि, रैली से पहले सरकारी तंत्र के कथित दुरुपयोग के चलते निशाने पर आए जयराम ठाकुर ने गुटों में बंटे विपक्ष को सियासी बारूद देकर ताकतवर भी कर किया है। 27 दिसंबर को ही शिमला में जयराम सरकार के खिलाफ कांग्रेस चार्जशीट पेश कर सियासी माहौल गरमाएगी। रैली से पहले ही जयराम, नड्डा, धूमल तीन ध्रुवों में बंटी भाजपा को मंच पर मोदी क्या सियासी संदेश देंगे, यह देखना दिलचस्प होगा। चुनाव से पहले टिकट के लिए सियासी उछलकूद कर रहे नेताओं को भी साफ तौर पर सियासी संकेत दिया जा सकता है।
मोदी रैली के बहाने हिमाचल भाजपा के कई नेता सियासी माइलेज लेने की कोशिश भी करेंगे। अंगुली पकड़कर सियासत सिखाने वाले हिमाचल भाजपा के भीषम पितामह शांता कुमार को रैली में मोदी चुनाव लड़ने या न लड़ने का क्या सियासी संकेत देंगे, यह देखना दिलचस्प होगा। 75 साल के फार्मूले पर बिछी सियासी धुंध भी हट सकती है। सिटिंग सांसद और लोकसभा चुनाव के लिए टिकट की लॉबिंग कर रहे नेता भी अपने अपने तरीके से राजनीतिक माइलेज लेने की कोशिश करेंगे।
शांता, नड्डा, जयराम के ज्यादा, धूमल के इक्का-दुक्का पोस्टर
धर्मशाला शहर रैली के लिए पूरी तरह पोस्टरों और होर्डिंग से भर चुका हैं। हर तरफ मोदी के साथ बैनरों पर हिमाचल के नेताओं के फोटो चस्पां हैं। लेकिन, धर्मशाला शहर के बीच हिमाचल के बड़े नेताओं के अकेले पोस्टर भी लगे हैं जिनमें धूमल गायब हैं। शांता, नड्डा और जयराम के अकेले सैकड़ों पोस्टर लगे हैं। इनमें धूमल के पोस्टर इक्का-दुक्का ही हैं।