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जंगलों में नहीं छोड़े जाएंगे बंदर, सरकार ने बनाया ये प्लान

Tue, 25 Apr 2017 10:34 AM IST
प्रखर दीक्षित/अमर उजाला, शिमला
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हिंसक जीव घोषित कर बंदरों को मारने की छूट देने वाली हिमाचल सरकार अब उन्हीं बंदरों को पालने की तैयारी कर रही है। प्रदेश सरकार राजधानी शिमला के नजदीक तारादेवी में ही एक लाइफ टाइम केयर सेंटर बनाने जा रही है। इस लाइफ टाइम केयर सेंटर में नसबंदी के बाद बंदरों को रखने की व्यवस्था की जाएगी। खास बात यह है कि पहले सरकार वाटिका में सिर्फ हमला करने वाले बंदरों को रखने पर विचार कर रही थी। लेकिन अब नसबंदी होने वाले बंदरों को रखा जाएगा। 
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हिमाचल प्रदेश में बंदरों के आतंक से हजारों किसानों ने कृषि छोड़ दी है। वहीं, हर साल हजार से ज्यादा लोग बंदरों के हमलों का शिकार होते हैं। पिछले साल मई महीने में हिमाचल सरकार ने बंदरों को वर्मिन घोषित करने की कवायद शुरू की। केंद्र सरकार ने भी शिमला के लिए पहले छह महीने और फिर वर्मिन पीरियड की मियाद को छह महीने और बढ़ा दिया। इसके अलावा प्रदेश के 68 अन्य शहरों में भी बंदरों को एक साल के लिए वर्मिन घोषित कर दिया गया।

हालांकि वर्मिन घोषित होने की मियाद पूरी होने को है लेकिन सरकारी आंकड़ों में अब तक एक भी बंदर के मारे जाने की सूचना नहीं है। प्रधान मुख्य अरण्यपाल वन्यजीव एसके शर्मा ने बताया कि नसबंदी के बाद बंदरों के उग्र होने के मामलों के सामने आने के बाद यह फैसला लिया गया है। कहा कि इसके लिए बजट का प्रावधान भी किया गया है, हालांकि इस पर काम मई महीने में वर्मिन की मियाद पूरी होने के बाद शुरू किया जाएगा। 
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पूर्वोत्तर के राज्यों के इनकार के बाद उठाया कदम
दरअसल, प्रदेश सरकार ने अपने यहां के बंदरों को पूर्वोत्तर के प्रदेशों में भेजने के लिए पत्राचार शुरू किया। शुरुआत में नगालैंड, अरुणाचल और मिजोरम की सरकारों ने सैद्घांतिक मंजूरी दे दी लेकिन बाद में अपने यहां बंदरों की समस्या का हवाला देते हुए उन्होंने बंदरों को लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद सरकार ने अब वानर वाटिका बनाने की कवायद शुरू कर चुकी है। 

1.17 लाख बंदरों की नसबंदी के बाद भी नतीजा सिफर
वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो अब तक 1.17 लाख बंदरों की नसबंदी की जा चुकी है। इस कवायद में दो करोड़ से ज्यादा की राशि बंदरों को पकड़ने के अलावा आपरेशन, उपकरण खरीद और जंगल में छोड़ने की प्रक्रिया पर खर्च हो चुका है। लेकिन इस सब कवायद के बाद भी बंदरों के आतंक की वजह से किसानों बागवानों की करोड़ों रुपये की बागवानी कृषि बर्बाद हो चुकी है।
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