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आपको झटका देने की तैयारी में है प्रदेश सरकार

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हिमाचल में डीजल महंगा हो सकता है। प्रदेश सरकार पंजाब की तर्ज पर डीजल पर वैट 9.60 से बढ़ाकर 12 फीसदी करने की तैयारी में है। कैबिनेट की बैठक में चर्चा के बाद आबकारी एवं कराधान मंत्री प्रकाश चौधरी ने विभाग को इस बारे में प्रस्ताव बनाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। इस प्रस्ताव को कैबिनेट की आगामी बैठक में लाने की तैयारी है।
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बारह फीसदी वैट होने पर प्रदेश में डीजल के रेट करीब एक रुपया और बढ़ जाएगा। हिमाचल में अभी डीजल 52.70 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक रहा है। हिमाचल सरकार ने पिछले महीने ही कैबिनेट की बैठक में डीजल पर वैट 9.60 से बढ़ा कर 10.40 फीसदी करने का फैसला लिया था, लेकिन अधिसूचना जारी नहीं होने के कारण बढ़ा हुआ वैट लागू नहीं हो सका था। यानी, डीजल पुरानी दरों पर ही बिक रहा है।

इसी बीच, प्रदेश सरकार ने डीजल पर वैट को 9.60 फीसदी से बढ़ाकर सीधे 12 फीसदी करने का सैद्धांतिक तौर पर फैसला ले लिया है। इससे उपभोक्ताओं पर जहां प्रति लीटर एक रुपये अतिरिक्त भार पड़ेगा, वहीं इससे राज्य सरकार को 51 करोड़ रुपये की सालाना आय होगी। डीजल पर वैट बढ़ने से प्रदेश में महंगाई भी बढ़ सकती है।
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वापस होंगे अफसरों के वाहन और ड्राइवर

आर्थिक संकट से जूझ रही हिमाचल सरकार आने वाले समय में सहायक और अधिशासी अभियंता स्तर के अफसरों से वाहन वापस ले सकती है। वाहन और ड्राइवर के बदले इन अफसरों को निर्धारित भत्ता दिया जा सकता है। सरकारी खर्च कम करने के लिए इस फार्मूले पर मंथन शुरू हो गया है। रिसोर्स मोबलाइजेशन कैबिनेट सब कमेटी की बैठक में इस पर सहमति बन गई है। अब कमेटी जल्द इस बारे में राज्य सरकार से सिफारिश करेगी।

बागवानी मंत्री विद्या स्टोक्स की अध्यक्षता में देर रात को हुई कैबिनेट सब कमेटी की बैठक में सभी सदस्यों ने एकमत से कहा कि सरकारी खजाने का बोझ कम करने के लिए वाहन खर्च को घटाना बेहद जरूरी है। ऐसे में सरकारी वाहनों की नई खरीद पर पूर्ण प्रतिबंध के साथ वाहनों की मौजूदा संख्या को 25 फीसदी कम किया जाए।

हिमाचल में सरकारी वाहनों की संख्या 25 सौ के करीब है। ऐसे में 600 से अधिक सरकारी वाहन कम किए जा सकते है। इन वाहनों पर सालाना करोड़ों रुपये पेट्रोल और ड्राइवरों के वेतन के नाम पर खर्च हो रहे हैं। कई जगह सरकारी वाहनों के दुरुपयोग के मामले भी सामने आए हैं।
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मंत्रियों के काफिले पर भी रोक

कैबिनेट सब कमेटी मंत्रियों के साथ वाहनों के काफिले पर भी रोक लगाने के पक्ष में है। कई ऐसे मंत्री हैं, जिनके साथ दौरे के दौरान काफी वाहन दौड़ते हैं। इससे सरकारी धन का दुरुपयोग होता है।

बैठक में सरकारी खर्च कम करने के लिए वाहनों की संख्या कम करने पर विचार किया गया। अगले एक माह के भीतर कमेटी की दो से तीन और बैठकें की जाएंगी। इसके बाद अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंप दी जाएगी।
- जीएस बाली, सदस्य कैबिनेट सब कमेटी
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