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निजी सहभागिता से बनेंगी योजनाएं

Mon, 28 Jul 2014 04:03 PM IST
धर्मेंद्र पंडित/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल में बड़ी विकास योजनाएं अब निजी सहभागिता के सहयोग से बनेंगी। शहरी विकास विभाग ने बड़े प्रोजेक्टों की समीक्षा शुरू कर दी है। सरकार ने शहरी परिषद और नगर निकायों से विकास संबंधित बड़ी योजनाओं का ब्योरा मांगा है।
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पीपीपी मोड़ पर किए जाने वाले विकास कार्यों पर सरकार के उच्च अधिकारियों की बैठक हुई है, इसमें विभागों को ये आदेश जारी हुए हैं। इसका एक कारण सरकार की वित्तीय स्थिति ठीक न होना भी है।

इन योजनाओं को किया शामिल
शहरों में पब्लिक पॉथ, टाउनशिप, टनल, पार्किंग, लिफ्ट, सीवरेज सिस्टम और पेयजल प्रोजेक्ट आदि इसमें शामिल हैं, जिनका निर्माण पीपीपी मोडसे होना है। पब्लिक पॉथ और टनल और पेयजल प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार है। प्रदेश सरकार के पास इतना पैसा नहीं है कि वह अपने स्तर पर इन बड़े प्रोजेक्ट को समय रहते बना सके।
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32 हजार करोड़ कर्ज है सरकार पर
वर्तमान में प्रदेश सरकार पर 32 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। इस वित्तीय वर्ष में अब तक प्रदेश सरकार को केंद्र से 1050 करोड़ राशि मिली है। सूत्रों का कहना है कि अप्रैल महीने में सरकार को 500 करोड़, मई में 200 करोड़, जून में 200 करोड़ मिले। जुलाई में सरकार ने केंद्र से 200 करोड़ की मांग की थी, लेकिन 150 करोड़ की ही राशि मिली।

विकास कार्यों की मांगी रिपोर्ट : सुधीर शर्मा
शहरी आवास मंत्री सुधीर शर्मा ने बताया कि अब जो भी विकास कार्य होंगे वह पीपीपी मोड के तहत होंगे। इसके लिए अधिकारियों के साथ बैठक हुई है। शहरों में क्या-क्या किया जा सकता है, इसकी रिपोर्ट मांगी गई है।

निजी हाथों में दे रहे प्रोजेक्ट
प्रधान सचिव वित्त श्रीकांत बाल्दी ने बताया कि विकास से संबंधित प्रोजेक्टों को निजी हाथों में दिया जा रहा है। यूडी अधिकारियों के साथ इस बारे में बैठक हो चुकी है। अभी तक केंद्र सरकार को ओर से बड़ा प्रोजेक्ट नहीं मिला है। जब प्रोजेक्ट मिलेगा, उसके बाद ही विचार किया जाएगा।
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