मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि हिमाचल प्रदेश लंबे समय से अपने वैधानिक अधिकारों की प्रतीक्षा कर रहा है और अब राज्य सरकार इन्हें हर हाल में सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि बीबीएमबी से संबंधित लंबित वित्तीय दावों का समाधान हुए बिना प्रदेश के हितों की अनदेखी नहीं की जा सकती। मुख्यमंत्री ने बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि 422 मेगावाट क्षमता वाली किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना पर हिमाचल प्रदेश तभी आगे बढ़ेगा, जब हरियाणा सरकार बीबीएमबी से जुड़े बकाया भुगतान के संबंध में स्पष्ट सहमति दे और इस आशय का शपथ-पत्र सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल करे। उन्होंने कहा कि बार-बार आग्रह के बावजूद पंजाब और हरियाणा ने हिमाचल प्रदेश को उसके वैधानिक अधिकारों से वंचित रखा है। ऐसे में प्रदेश के हितों की अनदेखी करते हुए किसी नई परियोजना में सहयोग की अपेक्षा करना न्यायसंगत नहीं होगा।
केंद्रीय मंत्री ने दिया समाधान का भरोसा
मुख्यमंत्री के आग्रह पर केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने आश्वासन दिया कि वह इस विषय पर पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों से चर्चा करेंगे। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के वैधानिक अधिकारों की रक्षा और विवाद के समाधान के लिए आवश्यक पहल करने का भरोसा भी दिया।
15 साल पुराने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को याद दिलाया कि लगभग 15 वर्ष पहले सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में हिमाचल प्रदेश को बीबीएमबी परियोजनाओं और उनसे प्राप्त होने वाले लाभों में 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिकार प्रदान किया था। इसके बावजूद प्रदेश को पिछले एक दशक से अधिक समय से अपने हिस्से की 13,066 मिलियन यूनिट बिजली और उससे जुड़े वित्तीय लाभ नहीं मिल पाए हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद हिमाचल को उसके अधिकारों से वंचित रखा गया, जिसके कारण प्रदेश को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।