मोदी सरकार की ओर से बनाई गई आरक्षण की नई आर्थिक रूप से कमजोर श्रेणी के प्रमाणपत्र जारी होने में होने वाली देरी पर जयराम सरकार ने सख्त नाराजगी जताई है। कार्मिक विभाग ने सभी उपायुक्तों को निर्देश जारी किए हैं कि इस श्रेणी के प्रमाण पत्रों को जारी करने में देरी न की जाए।
साथ ही प्राथमिकता के आधार पर इन प्रमाणपत्रों को जारी करने के लिए वेरिफिकेशन करवाई जाए। सरकार ने प्रमाणपत्र जारी होने में देरी होने की शिकायतों के बाद यह निर्देश जारी किए हैं। केंद्र की मोदी सरकार ने पिछले लोकसभा चुनाव से पहले आर्थिक आधार पर सामान्य श्रेणी के गरीबों को आरक्षण देने की व्यवस्था की थी। इसके तहत दस प्रतिशत आरक्षण दिया गया।
प्रदेशों ने भी नौकरियों और सरकारी कॉलेजों में दाखिले में यह व्यवस्था लागू कर दी। व्यवस्था लागू होने के बाद राजस्व विभाग ने जुलाई में प्रोसीजर निर्धारित कर आय व संपत्ति के सर्टिफिकेट का फार्मेट भी जारी कर दिया, जिन्हें प्रूफ के तौर पर भर्ती के दौरान लगाया जा सकता था, लेकिन केंद्रीय कार्मिक एवं जन शिकायत निवारण विभाग के सचिव के पास बड़ी संख्या में शिकायतें पहुंची।
इनमें बताया गया कि स्थानीय अधिकारी प्रमाणपत्र जारी नहीं कर रहे हैं। शिकायतों पर मंत्रालय ने प्रदेश को पत्र लिखकर सख्त नाराजगी जताई। केंद्र की नाराजगी के बाद कार्मिक विभाग ने सभी जिला उपायुक्तों को निर्देश जारी किए हैं कि वेरिफिकेशन करने के बाद प्राथमिकता देते हुए उनके प्रमाणपत्र जारी किए जाए।