फिलहाल प्रदेश को नॉर्थ ईस्ट और अन्य हिमालयी राज्यों के साथ नए निवेशकों के लिए वर्ष 2027 तक जीएसटी में कुछ छूट का लाभ दिया जा रहा है। प्रदेश की भाजपा सरकार वित्त मंत्री को अवगत करवा चुकी है कि निवेशकों को आकर्षित करने के लिए हिमाचल को विशेष पैकेज मिलना जरूरी है।
प्रदेश की बदहाल अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए सरकार ने अगले 15 साल के लिए विशेष पैकेज मांगा है। नए निवेशकों को पहले पांच वर्ष 100 फीसदी इनकम टैक्स सहित अन्य करों में छूट, कैप्टिल सब्सिडी के लिए कुल निवेश का 15 से 20 फीसदी और माल ढुलाई के लिए ट्रांसपोर्ट सब्सिडी स्कीम पैकेज का मुख्य हिस्सा रहेगा।
केंद्र अगर पैकेज स्वीकृत करता है तो राज्य सरकार अपने स्तर से बिजली और भूमि आवंटन में कुछ रियायतें नई इंडस्ट्री को दे सकती है। अभी केंद्र की ओर से नॉर्थ ईस्ट के सात राज्यों के साथ जम्मू कश्मीर, हिमाचल, सिक्कम और उत्तराखंड को औद्योगिक निवेश पर कर छूट मिल रही है।
सरकार ने जुलाई 2017 को जीएसटी लागू होने के बाद नए उद्योगों के लिए टैक्स रिफंड का विशेष प्रावधान किया है, लेकिन इससे कोई बड़ा लाभ प्रदेश को नहीं मिल पाया है।
प्रदेश में अभी तक औद्योगिक इकाइयों से लगभग साढ़े तीन लाख रोजगार मिल रहा है। विशेष पैकेज मिलने से प्रदेश में निवेश दोगुना हो जाएगा, जिससे पांच लाख अतिरिक्त रोजगार अगले पांच वर्ष में हो सकता है।
बिना पैकेज के पिछले दो वर्षों में केवल एक बड़ी औद्योगिक इकाई स्थापित हुई है जबकि लघु और मध्य दर्जे के उद्योगों की संख्या में 2900 की वृद्धि हुई है और 40 हजार युवाओं को रोजगार के अवसर मिले हैं।
ये है मजबूत आधार
लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र का बजट लोक लुभावन रहने की उम्मीद है। केंद्र में भाजपा सरकार के होने के साथ हिमालयी राज्यों में भाजपा की प्रदेश सरकारें हैं। नॉर्थ ईस्ट में असम और मणिपुर के बाद दूसरे राज्यों में भी भाजपा अपना वर्चस्व बढ़ा रही है जबकि जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल में भाजपा सरकार है। ऐसे में केंद्र से पैकेज मिलने की उम्मीद अधिक है।
हिमाचल में औद्योगिक निवेश
श्रेणी संख्या निवेश (रुपये करोड़ में) रोजगार
लघु इकाइयां 42975 9616.77 263206
मध्य श्रेणी 434 5607.22 40669
बड़ी इकाइयां 138 6853.12 29082
(आंकड़े औद्योगिक विभाग की वेबसाइट से)