पांच विद्यार्थियों से कम संख्या वाले 99 सरकारी प्राइमरी स्कूल बंद करने के बाद अब प्रदेश में दस विद्यार्थियों से कम संख्या वाले स्कूलों को बंद करने की तैयारी शुरू हो गई है। गुणात्मक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने सरकार को यह प्रस्ताव भेजा है। साथ लगते स्कूलों में मर्ज होने वाले स्कूलों के बच्चों को सुगमता से नए स्कूल तक पहुंचने के लिए ट्रांसपोर्ट अलाउंस देने की योजना भी बनाई गई है।
निदेशालय का तर्क है कि वर्तमान में कई स्कूलों में बच्चे कम होने से ग्रुप लर्निंग का माहौल नहीं बन पा रहा है। ऐसे में कम विद्यार्थियों की संख्या वाले स्कूलों को दूसरे स्कूलों में मर्ज किया जाना चाहिए। निदेशालय का प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन है। इसे लेकर अंतिम फैसला मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश में करीब 250 ऐसे स्कूल चिन्हित किए हैं, जहां विद्यार्थियों की संख्या 10 से कम है। इन स्कूलों के आसपास अन्य स्कूल भी मौजूद हैं।
विद्यार्थियों को किया जाएगा शिफ्ट, मिलेगा ट्रांसपोर्ट अलाउंस
जहां बंद किए जाने वाले स्कूलों के विद्यार्थियों को शिफ्ट किया जा सकता है। स्कूल मर्ज होने से विद्यार्थियों को दूसरे स्कूल तक जाने में परेशानी न हो, इसके लिए ट्रांसपोर्ट अलाउंस देने का प्रावधान किया गया है। 200 से 300 रुपये प्रतिमाह तक धनराशि देने की निदेशालय ने योजना बनाई है। तर्क दिया जा रहा है कि जिन क्षेत्रों के स्कूलों में पथ परिवहन निगम की बसों की सेवा उपलब्ध नहीं होगी, वहां टैक्सी से स्कूल आने-जाने के लिए अलाउंस दिया जाएगा।
मर्ज किए जाने वाले स्कूलों के शिक्षकों और अन्य स्टाफ को रिक्त पदों वाले स्कूलों में नियुक्ति दी जाएगी। सरकार अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो जहां सरकारी पैसे की बचत होगी, वहीं स्कूलों में चल रही शिक्षकों की कमी दूर होगी। विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए प्रतिस्पर्धा का माहौल भी मिलेगा।
चुनावी साल में फैसला लेना आसान नहीं
दस विद्यार्थियों से कम संख्या वाले सरकारी स्कूलों को बंद करने का फैसला लेना सरकार के लिए चुनावी साल में आसान नहीं रहेगा। जिन क्षेत्रों के स्कूल बंद होंगे, वहां के लोगों के गुस्से का सरकार को सामना करना पड़ेगा।
बीते साल जिन 99 स्कूलों को बंद किया गया है, उनका विरोध भी अभी थमा नहीं है। स्थानीय लोग जनप्रतिनिधियों के माध्यम से मुख्यमंत्री से लेकर निदेशालय तक अपने ज्ञापन भेज रहे हैं।