वहीं पुरानी योजनाओं को आगे बढ़ाने और विस्तार के लिए उनको बजट देना भी जरूरी होगा। इनवेस्टर मीट को देखते हुए उद्योग जगत को लुभाने के लिए भी बजट में बड़े एलान की संभावनाएं जताई जा रही हैं। जानकारों का कहना है कि उद्योगों को बढ़ावा देकर न सिर्फ उद्योग जगत में जयराम अपनी लोकप्रियता बढ़ाना चाहेंगे, बल्कि भाजपा के रोजगार के अवसर बढ़ाने के वादे को भी बल मिलेगा।
चुनावी वादों में ज्यादातर पर जयराम सरकार ने पहले साल में छुआ जरूर है, ऐसे में इस बार के बजट में उन कार्यों को मजबूती के साथ आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। चुनावी साल के लोकलुभावन बजट की आहट प्रदेश सरकार द्वारा सालाना प्लान को 63 सौ करोड़ से 71 सौ करोड़ करने से महसूस की जा सकती है। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री जयराम किस तरह सभी चीजों में तालमेल बैठाकर केंद्र की तर्ज पर जनहित का बजट पेश करते हैं।