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हड़ताल पर गए ग्राम सेवक तो सरकार लेगी ये एक्शन, दी चेतावनी

Thu, 25 May 2017 12:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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सरकार ने हड़ताल पर जाने वाले ग्राम रोजगार सेवकों को आंदोलन रद्द नहीं करने पर बर्खास्त करने का फैसला लिया है। ग्राम सेवकों ने 26 मई से काम ठप करने की चेतावनी दी थी। जिस पर ग्रामीण विकास विभाग ने कड़ा संज्ञान लिया है। ग्रामीण विकास विभाग ने बुधवार को ग्राम रोजगार सेवकों के लिए चेतावनी पत्र जारी कर दिया है।
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अगर ग्राम सेवकों ने आंदोलन रद्द नहीं किया तो उन्हें बर्खास्त किया जाएगा बल्कि उनके स्थान पर नई नियुक्तियां कर दी जाएंगी। ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के निदेशक आर सेलवम की ओर से यह पत्र जारी हुआ है। ग्राम सेवक संघ ने 26 मई से 13 जून तक कामकाज ठप कर हड़ताल पर रहने का फैसला लिया था।

ग्राम सेवकों के हड़ताल पर जाने से 70 हजार लोग प्रभावित होंगे। पंचायतों में इन दिनों मनरेगा और 14वें वित्तायोग में विकास कार्य चल रहे हैं। इन कार्यों को कराए जाने में इन सेवकों का अहम रोल रहता है। हड़ताल पर जाने से प्रदेश भर में न तो मस्टररोल जारी होंगे और न ही श्रमिकों को पेमेंट हो सकेगी। 
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झूठ बोल रहे ग्राम सेवक

इसी तरह से प्रदेश में चल रहे जियो टैगिंग, जॉब कार्ड की वेरिफिकेशन का कार्य भी प्रभावित होगा। ग्राम रोजगार सेवक ने 11 मई को सरकार और विभाग को ज्ञापन के माध्यम से 15 दिन पहले अल्टीमेटम जारी कर दिया है। इसमें संघ ने एक समान काम एक समान वेतन देने की मांग की थी। 3 साल को बिना किसी वित्तीय लाभ दिए दैनिक भोगी के कार्यकाल में कम करना, जीआरएस को ग्रामीण


विकास विभाग में रिक्त पड़े पंचायत सचिवों के पदों पर नियमित करना, पांच वर्षों से कम कार्यकाल वाले जीआरएस का सालान 1 हजार मानदेय बढ़ाना व नियमित स्केल के स्थान पर जीआरएस को नियमित करने करने की मुख्य मांगे शामिल हैं। ग्राम सेवक संघ के प्रदेशाध्यक्ष शिव राज ठाकुर ने कहा कि पिछले कई वर्षों से दिन रात कार्य करने वाले ग्राम रोजगार सेवकों की मांगे पूरी करने को सरकार तैयार नहीं है। इसके चलते हड़ताल पर जाने का फैसला लिया गया है। 

पत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि 26 मई 2016 को ग्राम सेवकों की हड़ताल के बाद उनकी तमाम ंमांगों को माना गया। 8 जुलाई 2016 को सरकार ने विस्तृत पालिसी जारी की गई। आईबिड पालिसी का खाका ग्राम रोजगार सेवकों के संघ से वार्ता कर बनाया गया था। संघ ने पालिसी जारी होने के बाद 14 जुलाई को धन्यवाद ज्ञापन भी विभाग को भेजा था। निदेशक ने अब संघ की मांगों को नाजायज और गैरकानूनी बताया है। 
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