हिमाचल प्रदेश सरकार अब अपनी जलविद्युत संपदा को अधिक कमाई का जरिया बनाने की तैयारी में है। राज्य सरकार 146 परियोजनाओं से मिलने वाली करीब 1572 मेगावाट बिजली को शेयर मार्केट की तर्ज पर बाजार की मांग और कीमतों पर नजर रखते हुए बेचेगी। इसके लिए सरकार ने पेशेवर पावर ट्रेडिंग कंपनियों के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
ऊर्जा विभाग ने बिजली के विपणन और व्यापार के लिए ई-टेंडर जारी किए हैं। चयनित पावर ट्रेडर देश के विभिन्न बिजली बाजारों, एक्सचेंजों और राज्यों में बिजली की कीमतों पर नजर रखेंगे और जहां बेहतर दाम मिलेंगे, वहां बिजली बेचेंगे। सरकार को केंद्रीय, राज्य, संयुक्त और निजी क्षेत्र की कुल 146 जलविद्युत परियोजनाओं से निशुल्क बिजली और इक्विटी पावर के रूप में हिस्सा मिलता है। इन परियोजनाओं से कुल 1571.95 मेगावाट बिक्री योग्य बिजली उपलब्ध है।
इसमें 1134.42 मेगावाट निशुल्क बिजली और 437.53 मेगावाट इक्विटी पावर शामिल है। जिस तरह शेयर बाजार में निवेशक सही समय देखकर शेयर खरीदते और बेचते हैं, उसी तरह बिजली बाजार में भी कीमतें हर समय एक जैसी नहीं रहतीं।
गर्मी, सर्दी, उद्योगों की मांग और राज्यों की जरूरत के अनुसार बिजली के दाम बदलते रहते हैं। नई व्यवस्था में पावर ट्रेडिंग कंपनी बाजार की चाल पर नजर रखेगी और अधिक मांग वाले समय में बिजली बेचकर सरकार को ज्यादा राजस्व दिलाने का प्रयास करेगी। साथ ही बिजली की शेड्यूलिंग और व्यापारिक प्रक्रियाएं भी संभालेगी।
सरकार भविष्य में केवल जलविद्युत तक सीमित नहीं रहना चाहती। इसलिए इस व्यवस्था में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से मिलने वाली बिजली के विपणन की संभावनाओं को भी शामिल किया गया है। ऊर्जा निदेशालय के अधिकारियों का मानना है कि यदि बाजार आधारित यह मॉडल सफल रहा तो हिमाचल अपनी बिजली संपदा से कहीं अधिक राजस्व अर्जित कर सकेगा।