कृषि और खाद्य क्षेत्र में मौजूदा क्षमताओं को मजबूत और विस्तार करने के लिए राज्य सरकार और कार्यकारी अध्यक्ष और सीईओ आईएमईए-टीआईएफएफ और मुख्य कार्यकारी अध्यक्ष डीएमसीसी अहमद बिन सुलेयम के बीच एक और समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। आपसी सहयोग, द्विपक्षीय प्रतिनिधिमंडल, द्विपक्षीय व्यापार और निवेश आदि गतिविधियां एमओयू का हिस्सा होंगी। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मंगलवार को दुबई में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के आर्थिक मंत्रालय के महासचिव जमाल अल जरवान के साथ भी बैठक की।
उन्होंने राज्य में खाद्य प्रसंस्करण, लॉजिस्टिकस, पर्यटन और बिजली आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के लिए विद्यमान अपार संभावनाएं उपलब्ध होने के बारे में महासचिव को अवगत करवाया। जमाल ने कहा कि यूएई भारत में खाद्य प्रसंस्करण, लॉजिस्टिकस और बुनियादी ढांचे में निवेश का इच्छुक है। जमाल ने अब्बू धाबी और दुबई में विभिन्न क्षेत्रों में किए निवेशों के बारे में भी अवगत करवाया। उन्होंने जानकारी दी कि यूएई हिमाचल के धर्मशाला में ग्लोबल इनवेस्टर्स मीट में भी भाग लेगा।
मुख्यमंत्री ने जाफजा और डीपी वर्ल्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहम्मद अल मुल्लेम से भी मुलाकात की। मुल्लेम ने कहा कि उनका समूह हिमाचल में निवेश करने के लिए विशेष रूप से लॉजिस्टिक्स और परिवहन के अलावा बागवानी एवं कृषि उत्पादों के आयात-निर्यात में उत्सुक है।
ये रहे मौजूद
उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव व मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. श्रीकांत बाल्दी, अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग मनोज कुमार, अतिरिक्त मुख्य सचिव पर्यटन राम सुभग सिंह, निदेशक उद्योग हंस राज शर्मा, विशेष सचिव अबीद हुसैन सादिक, मुख्यमंत्री के प्रधान निजी सचिव विनय सिंह और सीआईआई हिमाचल प्रदेश के प्रतिनिधि भी अन्य सहित इस अवसर पर उपस्थित थे।
ईको टूरिज्म की संभावनाएं तलाशने दुबई के निवेशक पराशर झील पर आएंगे। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व में यूएई के दौरे पर गए प्रदेश सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को दुबई में शीर्ष उद्योगपतियों के साथ बैठकें कीं और निवेशकों को हिमाचल प्रदेश में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया।
प्रतिनिधिमंडल ने औजान होर्डिंग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कनिष्का गुप्ता से भेंट की।
औजान होर्डिंग के पास पेय पदार्थों विशेषकर फलों के रस आदि का 100 से अधिक वर्षों का अनुभव है। उन्होंने राज्य में सेब कंसंट्रेट की खरीद पर विस्तृत में चर्चा की। होटल उद्योग में निवेश के अवसरों और एचपीएमसी के साथ ‘केन’ उत्पादन विनिर्माण और विकल्पों पर भी चर्चा की। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए पराशर झील का संयुक्त दौरा किया जा सकता है।
यूनाइटेड वर्ल्ड इंफ्रास्ट्रक्चर के इकोनोमिक क्लस्टर के प्रबंध निदेशक आदित्य सरना के साथ हुई बैठक में कंपनी ने राज्य में स्मार्ट सिटी और पर्यटन गंतव्य विकास परियोजनाओं में रुचि दिखाई। राज्य सरकार का सुझाव था कि सिरमौर जिले के राजगढ़ क्षेत्र को डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जा सकता है, जिसमें थीम पार्क, हिमाचली हस्तशिल्प और फूड जॉइंट आदि सुविधाओं उपलब्ध करवाने पर विचार किया जा सकता है।
ईराम समूह के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डॉ. सिदीक अहमद ने प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक में पर्यटन व वैलनेस क्षेत्रों में निवेश के प्रति रुचि दिखाई। प्रतिनिधिमंडल ने केएएएफ इन्वेस्टमेंट के वित्त प्रमुख नंदी वर्द्धन मेहत्ता के साथ भी बैठक की। केएएएफ इन्वेस्टमेंट ने विभिन्न क्षेत्रों में वैश्विक निवेश किया और पिछले वर्ष से भारत में भी निवेश करना शुरू किया है।
केएएएफ भारत जैसी विशाल एवं स्थायी अर्थव्यवस्था में निवेश की संभावनाएं तलाश रहा है। मुख्यमंत्री ने उद्यमियों को इस वर्ष नवंबर माह के दौरान राज्य सरकार की ओर से धर्मशाला में आयोजित की जाने वाली ग्लोबल इंवेस्टर्स मीट के लिए भी आमंत्रित किया। इस अवसर पर उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. श्रीकांत बाल्दी, मनोज कुमार और राम सुभग सिंह, निदेशक उद्योग हंसराज शर्मा, विशेष सचिव अबीद हुसैन सादिक, मुख्यमंत्री के प्रधान निजी सचिव विनय सिंह, सीआईआई हिमाचल प्रदेश के प्रतिनिधि भी अन्य सहित उपस्थित थे।