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हिमाचल: अंगीठी की गैस बन रही मौत का कारण, हर साल आ रहे दर्जनों मामले, ये सावधानी बरतें

Tue, 13 Jan 2026 11:31 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, सेालन।

सार

पहाड़ी क्षेत्रों में कड़ाके की ठंड से बचने के लिए अधिकतर अंगीठी का प्रयोग होता है, लेकिन यह अंगीठी लोगों की जान भी ले रही है। 
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अंगीठी(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में कड़ाके की ठंड से बचने के लिए अधिकतर अंगीठी का प्रयोग होता है, लेकिन यह अंगीठी लोगों की जान भी ले रही है। प्रदेश भर में हर सर्दी में अंगीठी की गैस और आग लगने के दर्जनों मामले आते है। अकी में हुआ अग्निकांड का प्रारंभिक कारण अंगीठी ही बताया जा रहा है। हालांकि इसकी जांच चल रही है। जानकारी के अनुसार हर सर्दी के मौसम में अंगीठी जलाकर बंद कमरों में सोने की घटनाएं सामने आती हैं, जिनमें दम घुटने से लोगों की मौत हो जाती है। इसमें अधिकतर मामलों में पोड़ितों को खतरे का अहसास तक नहीं होता और से नींद में ही मौत के आगोश में चले जाते हैं। यही वजह है कि अंगीठी से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस से मौत का पता ही नहीं बालता। 13 दिसंबर वर्ष 2024 में गांव रिहूं में अंगीठी की गैस लगने से तीन कामगारों की मौत हो गई। इससे पहले धर्मपुर में बुजुर्ग की भी गैस लगने से मौत हो चुकी है।

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कार्बन मोनोऑक्साइड गैस बेहद खतरनाक
 अंगीठी गा कोयले के जलने से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस बेहद खतरनाक होती है। यह गैस न तो दिखाई देती है और न ही इसमें कोई होते हैं। यही कारण है कि व्यक्ति को पता ही नहीं चलता कि वे जहर भरी हवा में सांस ले रहा है। यह गैस शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा को धीरे-धीरे कम कर देती है, जिससे पहले चक्कर, सिरदर्द और बेचैनी होती है, फिर मौत हो सकती है।
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ये सावधानी बरतें
मेडिसिन विशेषज्ञ क्षेत्रीय अस्पताल सोलन डॉ. तरूण शाहली बताते हैं कि जब आग का भुर्जा पूरी तरह निकल जाए और कोयला लकड़ी दाहक जाए, तभी उसे कमरे के अंदर रखें। कभी भी अंगीठी को कमरे में जलाकर न सोए। ध्यान रखें कि कमरे के अंदर अंगीठी के पास कोई ज्वलनशील पदार्थ नहीं होना चाहिए। यदि कमरे में दम घुटने जैसा लगे या गैस चढ़ जाए तो मरीज को तुरंत खुली हवा में लाएं और बिना समद गंवाए अस्पताल पहुंचाएं।
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