हिमाचल सरकार ने उद्योगों को कर्जा देने के लिए बनाए प्रदेश वित्त निगम (एचपीएफसी) को बंद करने की तैयारी कर ली है। मुख्य सचिव बीके अग्रवाल ने इसकी संपत्तियों, कर्मचारियों का राज्य औद्योगिक विकास निगम (एचपीएसआईडीसी) में विलय करने को तकनीकी रिपोर्ट मांग ली है। इसके बंद किए जाने का कारणयह है कि जिस उद्देश्य से वित्त निगम स्थापित किया था, अब यह उसे पूरा नहीं कर रहा है।
दूसरा, उद्योगपतियों ने कारोबार चलाने के लिए जो ऋण लिया था, वह भी इसे वापस नहीं कर रहे हैं। निगम के डिफाल्टरों के पास 132.62 करोड़ रुपये फंस गए हैं, जिनकी वापसी मुश्किल है। वित्त निगम ने 543.40 करोड़ रुपये के कर्ज अब तक दे रखे हैं। हालांकि, लोन देने से पहले निगम ने उद्योगपतियों की संपत्ति गिरवी रखी थी, लेकिन संपत्ति की कीमत ऋण से कहीं कम है या फिर मुकदमेबाजी शुरू हो हो गई है।