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कमियों को दूर करने की जगह पल्ला झाड़ते रहे शिक्षा विभाग के अधिकारी

Tue, 27 Feb 2018 12:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
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नेशनल अचीवमेंट सर्वे 2017 में हिमाचल के विद्यार्थी पिछड़ गए हैं। सर्वे में हिमाचल के विद्यार्थियों के पिछड़ने के कारण जानने और इसमें सुधार लाने के लिए होटल पीटरहाफ शिमला में मंथन हुआ। 

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जिला उपनिदेशकों ने अपनी कमियों को स्वीकार करने की जगह दूसरे जिलों की कमियों को गिनाया। स्कूलों में शिक्षकों की कमी, अभिभावकों की सहभागिता कम होने, मौसम खराब रहने जैसे तर्क देकर पल्ला झाड़ने का प्रयास किया। 

सोमवार सुबह 11 बजे से शाम चार बजे तक चली नेशनल अचीवमेंट सर्वे 2017 की समीक्षा बैठक का कोई पुख्ता परिणाम नहीं निकला। शिक्षा सचिव और निदेशक के आगे जिला उपनिदेशकों का एक भी तर्क नहीं टिका। 
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बैठक की अध्यक्षता करते हुए शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज को भी बोलना पड़ा। प्रदेश में शिक्षा का स्तर घट रहा है। शिक्षकों को रूटीन से अलग करने की जरूरत है। केरल के बराबर खड़े होने का हम दम भरते हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे भिन्न है। 

निदेशक के आंकड़ों पर उपनिदेशक ने साधी चुप्पी

उन्होंने शिक्षा की बेहतरी के लिए काम करने को कहा। कहा कि शिक्षक तबादलों और कोर्ट में न उलझकर रहें। राष्ट्र निर्माता की भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि बजट सत्र में भी शिक्षा का स्तर सुधारने को लेकर कई घोषणाएं की जाएंगी।

उधर, नेशनल अचीवमेंट सर्वे की नेशनल कोआर्डिनेटर इंद्राणी भादुड़ी ने बताया कि साल 2017 में किया गया सर्वे विश्व का सबसे बड़ा सर्वे है। इसे गिनीज बुक रिकार्ड में शामिल किया जा रहा है। सर्वे की पूरी प्रक्रिया को प्रधानमंत्री कार्यालय ने गूगल के माध्यम से मॉनीटर किया है।

नेशनल अचीवमेंट सर्वे 2017 में हिमाचल के स्कूलों के पिछड़ने को लेकर मंथन करने के लिए जिला उपनिदेशकों और डाइट प्रिंसिपलों की बैठक बुलाई थी। बताया गया कि जिला कांगड़ा अव्वल रहा है, जबकि सिरमौर पिछड़ा है।

सिरमौर के उपनिदेशक ने कहा कि जिले में शिक्षकों के कई पद रिक्त हैं। परिणाम खराब रहने का यह भी एक कारण है। उधर, निदेशक प्रारंभिक शिक्षा ने बताया कि सिरमौर में जेबीटी के 96 पद, एचटी के आठ और सीएचटी के पांच पद ही रिक्त हैं। ऐसे में शिक्षकों की कमी पिछड़ने का कारण नहीं मानी जा सकती।
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आठवीं तक के परिणाम एसीआर में करने पड़ेंगे दर्ज

शिक्षा सचिव अरुण कुमार शर्मा ने कहा कि आठवीं तक कम परीक्षा परिणाम आने पर शिक्षकों की एसीआर में कुछ लिखा नहीं जाता है। यह भी बच्चों के पढ़ाई में पिछड़ने का एक बड़ा कारण है। आठवीं तक की भी एसीआर लिखने का प्रावधान करना पड़ेगा। भाषा विषय में भी हिमाचल का बहुत बढ़िया प्रदर्शन नहीं दिखने पर भी शिक्षा सचिव ने नाराजगी जताई।

नीति आयोग से फंडिंग भी खतरे में पड़ी
केंद्र सरकार ने नेशनल अचीवमेंट सर्वे में 75 फीसदी परिणाम देने वाले जिलों को प्रोत्साहित करने के लिए नीति आयोग के तहत अधिक बजट देने का फैसला लिया है। सर्वे की साल 2017 की रिपोर्ट से प्रदेश को बड़ा धक्का लगा है। प्रदेश के किसी भी जिले का किसी भी विषय या किसी भी क्लास में 75 फीसदी से अधिक परिणाम नहीं रहा है।

बेस्ट प्रैक्टिस वाले शिक्षकों ने दी प्रस्तुति
सरकारी स्कूलों में बेस्ट प्रैक्टिस का प्रदर्शन करते हुए स्कूलों की सूरत बदलने और इनरोलमेंट बढ़ाने वाले दो शिक्षकों कोटखाई की निशा और सोलन के संजीव कुमार ने कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुति दी। जिला शिमला के कोटखाई के तहत बघार गांव में निशा ने सामाजिक भागीदारी बढ़ाते हुए सरकारी स्कूल को निजी स्कूलों के कहीं आगे लाकर खड़ा कर दिया है। इसी तरह सोलन के रुगरा मिडल स्कूल को शिक्षक संजीव कुमार ने संवारा है। यहां के बच्चे कई प्रतियोगिताओं में प्रदेश का नाम रौशन कर रहे हैं। शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने दोनों प्रस्तुतियां देखने के बाद अन्य शिक्षकों को भी इनसे प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
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