लोकसभा चुनाव के मुकाबले प्रदेश के सांसदों का प्रदर्शन इस बार गिरा है। प्रेम कुमार धूमल के बेटे और हमीरपुर के सांसद अनुराग ठाकुर का उनके संसदीय क्षेत्र की 17 विधानसभाओं में ग्राफ गिरा है। हर संसदीय क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत में गिरावट आई है।
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वर्ष 2014 के बाद पार्टी उपचुनावों में बेहतर करती रही, लेकिन विधानसभा में सीटें कम होना वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले खतरे की घंटी है। भाजपा की सबसे खराब स्थिति सांसद अनुराग ठाकुर और वीरेंद्र कश्यप की है, दोनों संसदीय क्षेत्रों में पार्टी को सर्वाधिक नुकसान हुआ है।
राहत सिर्फ मंडी सांसद रामस्वरूप शर्मा के लिए है, जिनके यहां विधानसभा सीटों में जीत की स्थिति में मामूली सुधार है। भाजपा पहली बार विधानसभा चुनाव में 48 प्रतिशत से अधिक मतदान हासिल कर पाई है, लेकिन यह लोकसभा चुनाव में रहे दिखे मोदी मैजिक से 7 प्रतिशत कम है।
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विधानसभा चुनाव में चारों सांसदों अनुराग, वीरेंद्र, रामस्वररूप और शांता कुमार को अपने क्षेत्र में वोट बैंक सुरक्षित रखने के लिए केंद्रीय नेतृत्व ने आगाह किया था। चारों सांसदों के जिम्मे ही उनके संसदीय क्षेत्र में सवा महीने की परिवर्तन रथ यात्रा चलाई गई।
54.5 से गिरकर 48.5 पहुंचा मत-प्रतिशत
सांसदों ने खूब दावे किए कि इस बार उनका प्रदर्शन 2014 से बेहतर होगा। लोकसभा चुनाव के बाद दो उपचुनावों भोरंज और सुजानपुर सीट पर भाजपा जीती। लेकिन अब विधानसभा चुनाव में हर सीट पर पार्टी को बढ़ा नुकसान झेलना पड़ा।
सांसद अनुराग की संसदीय की सीट से उनके पिता और मुख्यमंत्री प्रत्याशी धूमल, प्रदेश अध्यक्ष सत्ती और चार बार के विधायक रविंद्र रवि थे। ये तीनों हारे गए।
विधानसभा सीटों के हिसाब से शिमला में कांग्रेस ने अपने प्रदर्शन में सुधार किया है। आरक्षित संसदीय क्षेत्र में वीरेंद्र कश्यप ने वर्ष 2014 में मोदी मैजिक से 17 में से 3 विधानसभा सीटें गंवाई, जबकि इस बार 9 सीटों पर भाजपा हारी।
बेहतर प्रदर्शन करने वालों में मंडी के सांसद रामस्वरूप रहे, जिन्होंने लोकसभा चुनाव के मुकाबले सीटों की बढ़त दर्ज की है। उनके संसदीय क्षेत्र में 17 से पांच सीटों पर हार को अब चार तक पहुंचा दिया है। कांगड़ा संसदीय क्षेत्र में एक भी सीट नहीं हारी थी, जबकि इस बार भाजपा चार सीटों पर हारी है।
वर्ष 2017 का मत-प्रतिशत
भाजपा 48.5
कांग्रेस 43.5
अन्य 10
2014 से तुलना
कांगड़ा - लोकसभा चुनाव के दौरान 17 विधानसभाओं से सभी पर भाजपा आगे रही। विधानसभा चुनाव में डलहौजी, फतेहपुर, कांगड़ा और पालमपुर में मिली हार।
हमीरपुर - 17 विधानसभा क्षेत्रों में केवल हरोली विधानसभा में पीछे रहे, इस बार स्थिति बेहद खराब रही है। सुजानपुर, ऊना, देहरा, बड़सर, नादौन, हरोली, नैनादेवी में हार मिली।
शिमला- 17 विधानसभाओं से तीन सीटों श्रीरेणुका जी, शिलाई, रोहडू में भाजपा पिछड़ी थी। इस बार स्थिति बेहद खराब रही, अर्की, नालागढ़, सोलन, रेणुका, शिलाई, ठियोग, कसुम्टी, शिमला ग्रामीण और रोहडू में पार्टी पिछड़ी है।
मंडी- क्षेत्र की 17 विधानसभाओं में लोकसभा चुनाव के दौरान पांच सीटें भरमौर, लाहौल, सिराज, रामपुर और किन्नौर में पार्टी पिछड़ी। इस बार स्थिति सुधरी है। कुल्लू, जोगिंद्रनगर, रामपुर और रोहडू में पार्टी पिछड़ी है।
अब तक मत प्रतिशत
वर्ष 2012 - भाजपा 38.83, कांग्रेस 43.21
वर्ष 2007- भाजपा 43.78, कांग्रेस 39.54
वर्ष 2003 - भाजपा 35.38, कांग्रेस 41.0