जीत के बाद जश्न मनाते सुधीर शर्मा के समर्थक।
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हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित हो चुके हैं। कांग्रेस को 68 में से 40 सीटों से पूर्ण बहुमत मिला है, जबकि भाजपा केवल 25 सीटों पर ही सिमट गई। तीन निर्दलीय भी चुनाव जीते हैं। हालांकि, भाजपा की एक प्रतिशत से भी कम मतों के अंतर से हार हुई है। इस बार के चुनाव में भी कांगड़ा जिले ने साबित कर दिया कि वह सच में सियासी रूप से चुनाव में किंग मेकर बनता है। सूब के सबसे बड़े जिला कांगड़ा की कुल 15 में से 10 सीटों पर कांग्रेस ने जीत का परचम लहराया है। कांगड़ा जिला से लीड लेकर कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचाने में काफी मदद मिली। भाजपा को जिले में सिर्फ चार सीटें मिली हैं, जबकि एक सीट पर निर्दलीय ने बाजी मारी।2017 के चुनाव में भी कांगड़ा में समीकरण कुछ ऐसे ही थे।
2017 में भाजपा ने कांगड़ा में 11 और कांग्रेस ने तीन सीटें जीती थीं। एक सीट निर्दलीय ने जीती थीं। 2012 के चुनाव में कांगड़ा जिला में कांग्रेस ने 9 और भाजपा ने तीन सीटें जीती थीं। इस चुनाव में 3 निर्दलीय चुनाव जीते थे। 2007 के चुनाव में भी सरकार बनाने में सबसे ज्यादा योगदान कांगड़ा जिला का रहा था। इस चुनाव में भी कांगड़ा जिला ने ही भाजपा को सबसे ज्यादा विधायक दिए थे जिसके बल पर धूमल सरकार बनी थी। इससे पिछले चुनावों भी कांगड़ा जिला इसी तरह से जनादेश देकर सरकार बनाता रहा।
शिमला, हमीरपुर, सोलन जिलों ने भी बनाया कांग्रेस की सरकार बनाने का मजबूत रास्ता
हमीरपुर में पांच सीटों में से भाजपा को एक भी सीट नहीं मिली। सोलन की पांच सीटों में से भी कांग्रेस को चार और निर्दलीय को एक सीट ही मिली। शिमला में आठ सीटों में कांग्रेस को सात और भाजपा को एक सीट मिली। सिरमौर की पांच सीटों में से कांग्रेस को तीन और भाजपा को दो सीटें मिलीं। ऊना में पांच में से चार सीटें कांग्रेस को मिली हैं और एक भाजपा को मिली है। कुल्लू में चार सीटों में दो भाजपा और दो कांग्रेस को मिली हैं। जिला लाहौल स्पीति की एकमात्र सीट कांग्रेस को ही मिली है। किन्नौर की एक सीट पर कांग्रेस जीती है।
मंडी ने रखी जयराम की लाज,
-मंडी जिला ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की लाज रखी। यहां 10 में से 9 सीटों पर भाजपा और एक सीट पर कांग्रेस विजयी हुई है। चंबा जिले की पांच सीटों में से तीन पर भाजपा विजयी हुई, जबकि कांग्रेस दो हलकों में जीती।